मनरेगा व 15वें वित्त की राशि में भारी गड़बड़ी: कंचनपुर पंचायत के सरपंच-सचिव को कलेक्टर का कारण बताओ नोटिस

जिला ब्यूरो मनोज कुमार यादव कि रिपोर्ट
डिंडोरी।
जिले की ग्राम पंचायतों में शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही और भ्रष्टाचार के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा मामला जनपद पंचायत शहपुरा अंतर्गत ग्राम पंचायत कंचनपुर का है, जहां मनरेगा एवं 15वें वित्त आयोग की राशि के दुरुपयोग की शिकायत सही पाए जाने पर सरपंच कृष्ण कुमार ओटिये एवं सचिव लक्ष्मी प्रसाद यादव को कलेक्टर कार्यालय डिंडोरी द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत कंचनपुर के ग्रामीणों द्वारा 02 सितंबर 2025 को 9 बिंदुओं पर शिकायत प्रस्तुत की गई थी। शिकायत की जांच हेतु कलेक्टर कार्यालय के आदेश क्रमांक 609/शिकायत शाखा/2025, दिनांक 17 सितंबर 2025 के तहत गठित समिति ने स्थल निरीक्षण कर प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, जिसमें गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।
जांच में सामने आए प्रमुख तथ्य
ज्वाप नाला स्टॉप डैम निर्माण में माप पुस्तिका, भुगतान विवरण एवं आवश्यक ड्राइंग उपलब्ध नहीं कराई गई। डैम की गुणवत्ता अत्यंत निम्न पाई गई तथा भुगतान पूर्ण होने से पूर्व ही संरचना क्षतिग्रस्त हो गई।
ग्रेबियन स्ट्रक्चर के नाम पर पुराने बंड पर मात्र फेंसिंग जाली व पीसीसी से कंपार्ट गेट बनाए गए, जो तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए।
ग्राम डुंडीसारई में निर्मित पुलिया के अभिलेख, एमबी व ड्राइंग जांच दल को उपलब्ध नहीं कराई गई।
मजदूर राजेंद्र आर्मो को फर्जी हाजिरी के कारण मेट पद से पृथक किए जाने के बावजूद पृथक्करण के बाद भी मजदूरी भुगतान किया गया।
जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत तालाब के मध्य श्मशान में उपयोग होने वाला शेड पाया गया, जबकि स्थल चयन संबंधी प्रस्ताव पर किसी के हस्ताक्षर नहीं मिले।
डुंडीसारई तालाब की स्वीकृत ड्राइंग उपलब्ध नहीं कराई गई तथा बंधान में सीपेज के कारण भविष्य में तालाब के सूखने की आशंका जताई गई।
ग्राम सभा का आयोजन अंतिम बार 14 अप्रैल 2025 को ही किया गया, जो नियमों के विपरीत है।
तीन दिवस में जवाब तलब
जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट किया गया है कि पंचायत में मनमानी ढंग से गुणवत्ताहीन निर्माण कार्य कराए गए तथा आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत न किया जाना भ्रष्टाचार की ओर संकेत करता है।
इसी आधार पर सरपंच एवं सचिव को मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1996 एवं पंचायती राज अधिनियम 1993 के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए, इस संबंध में तीन दिवस के भीतर समाधानकारक जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
समय सीमा में जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने की स्थिति में एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।