बिजली विभाग की बड़ी लापरवाही! करंट से भैंस-बकरी की मौत, चरवाहा घायल, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

बार-बार शिकायत के बावजूद नहीं सुधरे हालात, भारतीय मजदूर संघ ने जिम्मेदारों पर कार्रवाई की उठाई मांग

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सीधी (सेमरिया)। जिले के थाना सेमरिया अंतर्गत ग्राम पंचायत मनकीसर में बिजली विभाग की कथित लापरवाही के चलते बड़ा हादसा सामने आया है। खुले और जमीन पर लटक रहे एलटी विद्युत तार की चपेट में आने से राजेश साहू (पिता लाला मन साहू) की लगभग ₹1 लाख कीमत की मुर्रा भैंस एवं एक बकरी की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं पशु चरा रहा एक चरवाहा करंट की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हो गया, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में बिजली के तार खंभों के बजाय कई स्थानों पर पेड़ों के सहारे डाले गए हैं। इस संबंध में कई बार बिजली विभाग को शिकायत की गई, लेकिन विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। ग्रामीणों का कहना है कि जर्जर और लटकते तारों के कारण हर समय बड़े हादसे का खतरा बना रहता है।
घटना के बाद ग्रामीणों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए डंडे की सहायता से करंट प्रवाहित तार को अलग किया, जिससे घायल चरवाहे की जान बचाई जा सकी। ग्रामीणों के अनुसार शोभई साहू (पिता दुर्घट साहू) को अनिल मिश्रा ने सुरक्षित बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। घटना की सूचना थाना सेमरिया में दर्ज कराई गई है।
इस मामले पर भारतीय मजदूर संघ के जिला मंत्री विकास नारायण तिवारी ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा, “अगर चरवाहे की जान चली जाती तो उसका जिम्मेदार कौन होता? विभाग की लापरवाही अब लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।”
घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि शिकायतों के बावजूद अधिकारी केवल आवेदन लेकर औपचारिकता निभाते हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं करते। ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए तत्काल प्रभाव से जर्जर और लटकते बिजली तारों को बदला जाए।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
जर्जर एवं लटकते बिजली तारों को तत्काल बदला जाए।
पीड़ित पशुपालक को उचित मुआवजा दिया जाए।
पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
जनता के सवाल
बार-बार शिकायत के बाद भी सुधार क्यों नहीं हुआ?
लापरवाही के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?
आखिर आम जनता न्याय के लिए किसके पास जाए?

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