अतिक्रमण के शिकंजे में आंगनबाड़ी, रास्ता बंद—2 साल से ताले में कैद बच्चों का हक

लाखों की लागत से बने तीन भवन बेकार; शासकीय जमीन पर कब्जा, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
डिंडौरी | जिला ब्यूरो मनोज कुमार यादव
नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 2 में शासकीय योजनाओं के तहत निर्मित आंगनबाड़ी भवन अतिक्रमण की भेंट चढ़ गए हैं। हालात यह हैं कि भवनों तक पहुंचने का रास्ता पूरी तरह बंद हो चुका है, जिसके चलते पिछले दो वर्षों से इन केंद्रों का संचालन शुरू नहीं हो पाया है। इससे बच्चों और महिलाओं को मिलने वाली जरूरी सेवाएं पूरी तरह ठप पड़ी हैं।
जानकारी के मुताबिक, वार्ड क्रमांक 2 के एक ही मोहल्ले में लाखों रुपये खर्च कर तीन आंगनबाड़ी भवन बनाए गए थे। लेकिन अतिक्रमणकारियों ने चारों ओर पक्के निर्माण कर रास्ता ही खत्म कर दिया, जिससे इन भवनों तक पहुंचना नामुमकिन हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब रास्ता ही नहीं बचा तो आंगनबाड़ी कैसे चलेगी। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि सरकारी योजनाओं के धरातल पर फेल होने की भी तस्वीर पेश करती है।
सूत्रों के अनुसार, जलाराम पेट्रोल पंप के सामने स्थित पटवारी हल्का नंबर 34 के प्लॉट नंबर 54/1 और 58/1 मूल रूप से शासकीय भूमि थी, जिसे कथित मिलीभगत से अवैध पट्टों में बदल दिया गया। पूर्व में हटाए गए अतिक्रमण भी दोबारा पक्के निर्माण में तब्दील हो गए हैं।
स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि क्षेत्र में शाम के समय अवैध गतिविधियां संचालित होती हैं, जिससे माहौल खराब हो रहा है। नर्मदा मंदिर जाने वाली महिलाओं ने भी असुरक्षा की आशंका जताई है।
गौरतलब है कि यह इलाका नर्मदा नदी के 300 मीटर के दायरे में आता है, जहां निर्माण कार्य पर्यावरणीय नियमों के खिलाफ है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
नागरिकों का आरोप है कि प्रभावशाली लोगों और दलालों की मिलीभगत से शासकीय योजनाओं का लाभ अपात्र लोगों तक पहुंच रहा है, जबकि असली हितग्राही वंचित रह जाते हैं।
मांग:
स्थानीय लोगों ने निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने, अतिक्रमण हटाने और आंगनबाड़ी भवनों तक पहुंच मार्ग बहाल कर जल्द से जल्द केंद्र शुरू कराने की मांग की है।