नवागत कलेक्टर का निरीक्षण, पटरी पर वापस आ रही प्रशासनिक व्यवस्था
पटरी पर वापस आ रही प्रशासनिक व्यवस्था

सीधी (अमित सिंह) । जिले में नवागत कलेक्टर साकेत मालवीय पदभार ग्रहण करने के बाद ही लगातार शासकीय कार्यालयों का निरीक्षण कर रहे हैं जिसके चलते बेट हुई प्रशासनिक व्यवस्था पटरी पर वापस आ रही है गत दिनों पदभार ग्रहण करने के बाद कलेक्टर श्री मालवीय कलेक्टर कार्यालय , जिला चिकित्सालय , निर्वाचन शासकीय उचित मूल्य दुकान, आंगनवाड़ी केंद्र एवं विद्यालय सहित अन्य शासकीय कार्यालयों का निरीक्षण कर रहे हैं सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि श्री मालवीय जनहित के कार्यों पर बेहद संजीदगी से नजर रख रहे हैं उनके द्वारा स्वास्थ्य व्यवस्था को प्राथमिकता में शामिल किया गया है जिला अस्पताल से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चुरहट सहित अन्य स्वास्थ्य केंद्रों का भी औचक निरीक्षण किया गया है।
ज्ञात हो कि गत वर्ष से प्रशासनिक व्यवस्था बे पटरी हो चुकी थी तत्कालीन कलेक्टर श्री खान के कार्यशैली के बदौलत प्रशासनिक व्यवस्था चौपट सी हो गई थी कलेक्ट्रेट तक ही सीमित रहने वाले कलेक्टर का तबादला तो हुआ किंतु उसके पहले 1 वर्ष में यहां सब कुछ समझ से परे रहा है नवागत कलेक्टर श्री मालवीय को इस बात की जानकारी है की प्रशासनिक व्यवस्था को सुधारना किसी चुनौती से कम नहीं है इसीलिए उनके द्वारा पदभार ग्रहण करने के बाद ही शासकीय कार्यालयों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को सुधारने का कार्य किया जा रहा है इसका असर भी चारों तरफ दिख रहा है इस बात की चर्चा हो रही है कि श्री मालवीय के द्वारा पदभार ग्रहण करने के बाद ही शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन व जनहित के कार्यों को प्राथमिकता में लेकर कार्य किया जा रहा है।

अधिकारियों की बैठक व आवश्यक दिशा निर्देश से अधिकारियों कर्मचारियों में भी कार्य के प्रति लगाव का एक माहौल बनता दिख रहा है ऐसे में माना जा सकता है कि नवागत कलेक्टर श्री मालवीय के कुशल कार्यशैली से जनहित के मुद्दों पर काम होंगे साथ ही शोषित पीड़ित वंचित की आवाज को अधिकारियों कर्मचारियों को सुनाना होगा । पात्र हितग्राहियों के लिए जनकल्याणकारी योजनाएं हैं उनके लाभ से भी लाभान्वित करना होगा।
स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल ,बिजली, खाद्य सहित अनेक ऐसे विभाग हैं जहां से लोगों को काफी आशाएं रहती हैं कुल मिलाकर नवागत कलेक्टर श्री मालवीय की कार्यशैली जिले वासियों को रास आ रही है अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में प्रशासनिक कसावट किस तरह कायम रहेगी।