राष्ट्रीय लोक अदालत में 2424 प्रकरणों का निराकरण, 6.70 करोड़ से अधिक के अवार्ड पारि

सीधी। 12 सितंबर 2026।
राष्ट्रीय लोक अदालत में आपसी सहमति एवं राजीनामे के माध्यम से विवादों के त्वरित समाधान की पहल को जिले में व्यापक सफलता मिली। जिला न्यायालय सीधी सहित चुरहट, रामपुर नैकिन एवं मझौली के सिविल न्यायालयों में आयोजित नेशनल लोक अदालत में कुल 2424 प्रकरणों का निराकरण किया गया। इन प्रकरणों में पक्षकारों के लिए 6 करोड़ 70 लाख 93 हजार 985 रुपये की राशि के अवार्ड पारित किए गए।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार आयोजित लोक अदालत का शुभारंभ जिला न्यायालय परिसर स्थित एडीआर भवन में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष प्रयागलाल दिनकर सहित न्यायाधीशों एवं अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित एवं माल्यार्पण कर किया गया।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रयागलाल दिनकर ने कहा कि पिछली नेशनल लोक अदालत की सफलता से मिली प्रेरणा के आधार पर इस बार भी अधिक से अधिक प्रकरणों का आपसी सहमति एवं राजीनामे के आधार पर निराकरण कराने के प्रयास किए गए। उन्होंने विद्युत विभाग, नगर पालिका, बीमा कंपनियों, अधिवक्ताओं, विभिन्न विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों तथा मीडिया के सहयोग की सराहना की।
21 खंडपीठों में हुई सुनवाई
जिला विधिक सहायता अधिकारी मनीष कौशिक के अनुसार जिला मुख्यालय सीधी में 11, चुरहट में 4, मझौली में 3 तथा रामपुर नैकिन में 3 खंडपीठों का गठन किया गया था। इस प्रकार जिले में कुल 21 न्यायिक खंडपीठों के माध्यम से प्रकरणों की सुनवाई एवं निराकरण किया गया।
लोक अदालत में समझौता योग्य आपराधिक एवं सिविल प्रकरणों के साथ विद्युत अधिनियम, श्रम, मोटर दुर्घटना दावा, चेक बाउंस, कुटुंब न्यायालय, जलकर तथा बैंक ऋण वसूली से संबंधित प्री-लिटिगेशन प्रकरणों को शामिल किया गया।
लंबित सभी 532 प्रकरणों का निराकरण
लोक अदालत में न्यायालयों में लंबित 532 प्रकरण रखे गए थे, जिनका शत-प्रतिशत निराकरण किया गया। वहीं 7389 प्री-लिटिगेशन प्रकरण रखे गए, जिनमें से 1892 प्रकरणों का निराकरण हुआ। इस प्रकार कुल 2424 प्रकरणों का निराकरण किया गया।
मोटर दुर्घटना दावा के 42 प्रकरणों में 1 करोड़ 57 लाख 62 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति राशि पक्षकारों को प्राप्त हुई। विद्युत अधिनियम के 97 लंबित प्रकरणों में 19 लाख 96 हजार 464 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। विद्युत के 989 प्री-लिटिगेशन प्रकरणों के निराकरण से 49 लाख 24 हजार रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
चेक बाउंस के 42 प्रकरणों में 2 करोड़ 56 लाख 24 हजार 197 रुपये की राशि शामिल रही। इसके अतिरिक्त 188 आपराधिक राजीनामा योग्य, 39 वैवाहिक, 32 सिविल एवं 54 अन्य प्रकरणों का भी निराकरण किया गया।
बैंक वसूली से संबंधित 92 प्री-लिटिगेशन प्रकरणों के निराकरण से विभिन्न बैंकों को 1 करोड़ 2 लाख 58 हजार रुपये की राशि प्राप्त हुई। नगरीय निकायों के जलकर से संबंधित 989 प्रकरणों के निराकरण से लगभग 31 लाख 99 हजार 290 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
पति-पत्नी का लंबे समय से चला आ रहा विवाद भी सुलझा
लोक अदालत में पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद का भी आपसी सहमति से सौहार्दपूर्ण समाधान हुआ। खंडपीठ क्रमांक 10 के समक्ष प्रकरण में पक्षकारों के बीच विवाद को राजीनामे के माध्यम से समाप्त किया गया। इस दौरान फरियादी की ओर से अधिवक्ता संतोष कुमार द्विवेदी एवं पीठासीन अधिकारी धीरज आर्य का विशेष योगदान रहा।
लोक अदालत के माध्यम से विवादों के समाधान से पक्षकारों के समय एवं धन की बचत होती है और आपसी संबंधों में भी सौहार्द बना रहता है।
कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता, अभियोजन अधिकारी, विद्युत विभाग, बैंक एवं नगरीय निकाय के अधिकारी, पैनल अधिवक्ता, पैरालीगल वालंटियर्स, मीडिया प्रतिनिधि तथा जिला न्यायालय एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारी उपस्थित रहे।