जड़ों से जुड़े रहकर ही विकास की राह संभव: कुलपति

मुबारक अली संवाददाता
शाहजहांपुर। स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना प्रकोष्ठ की ओर से अंत्योदय दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पुष्पेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि समाज और राष्ट्र की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब विकास का लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचे।
कुलपति ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का चिंतन समाज के समग्र विकास का मार्ग दिखाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी सांस्कृतिक और सामाजिक जड़ों से जुड़े रहने का आह्वान करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी केवल शिक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि युवाओं में सेवा, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी है।
मुख्य अतिथि विनोबा भावे सेवा आश्रम के संस्थापक एवं संचालक रमेश भैया ने अंत्योदय को सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ा संकल्प बताया। उन्होंने विद्यार्थियों से जरूरतमंद और वंचित वर्गों की सहायता के लिए आगे आने का आह्वान किया।
विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ आचार्य डॉ. अनुराग अग्रवाल ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद और अंत्योदय के विचारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विकास की सार्थकता तभी है, जब समाज के प्रत्येक वर्ग को उसका लाभ मिले। विद्यार्थियों को उनके जीवन और विचारों का अध्ययन कर उन्हें व्यवहार में उतारने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. बरखा सक्सेना ने किया, जबकि राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम समन्वयक प्रमोद कुमार यादव ने आभार जताया। डॉ. कविता भटनागर ने सरस्वती वंदना, स्वागत गान और राष्ट्रगीत प्रस्तुत किया।
पुस्तक का हुआ विमोचन
कार्यक्रम के दौरान कुलपति एवं अतिथियों ने इतिहास विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. दीपक सिंह और प्रो. सीमा गौतम द्वारा संपादित पुस्तक ‘राष्ट्रीय पुनर्जागरण के अग्रदूत : पंडित दीनदयाल उपाध्याय’ का विमोचन भी किया। पुस्तक में एकात्म मानववाद और अंत्योदय से जुड़े विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया है।
इस अवसर पर कला संकायाध्यक्ष प्रो. आलोक मिश्र, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. कमलेश गौतम, सहायक कुलसचिव रामबाबू केसरवानी, प्रो. मधुकर श्याम शुक्ला, प्रो. पूनम, डॉ. विकास खुराना, डॉ. श्रीकांत मिश्रा, डॉ. दुर्गविजय, डॉ. अर्चना गर्ग, डॉ. पूजा बाजपेयी, डॉ. पद्मजा मिश्रा, श्रीमती प्रीती, सौरभ मिश्र समेत शिक्षक एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।