कार्यालय मुख्य अभियंता जल संसाधन विभाग सिवनी पर गंभीर आरोप — जानकारी छुपाने से भ्रष्टाचार की आशंका गहराई

डिंडोरी-
जल संसाधन विभाग सिवनी के बैनगंगा कछार कार्यालय पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी को कई महीनों तक जानबूझकर रोककर रखा, जिससे विभागीय अनियमितताओं और संभावित भ्रष्टाचार के संकेत सामने आ रहे हैं।
डिंडोरी निवासी रामकिशोर. नागेश्वर ने दिनांक 17 जून 2025 को भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 76, लोक अभिलेख अधिनियम 1993 की धारा 122 और आरटीआई अधिनियम 2005 की धारा 6(1) एवं 6(3) के तहत प्रमुख अभियंता, जल संसाधन विभाग, तुलसी नगर भोपाल से महत्वपूर्ण सूचनाएं मांगी थीं।
भोपाल कार्यालय ने 24 जून 2025 को अपने पत्र क्रमांक 21/11/3946 में स्पष्ट लिखा कि मांगी गई जानकारी मुख्य अभियंता, बैनगंगा कछार सिवनी से संबंधित है और उन्हें आवेदक को सूचना उपलब्ध कराने के लिए निर्देशित भी किया गया था।
❗ लेकिन इसके बावजूद आज तक सूचना नहीं
मुख्य अभियंता ए. के. डेहरिया, बैनगंगा कछार, सिवनी द्वारा न तो सूचना उपलब्ध कराई गई और न ही किसी प्रकार का लिखित उत्तर दिया गया।
आवेदक ने कई बार फोन पर संपर्क किया, आश्वासन तो मिला पर सूचना नहीं।
इसके बाद आवेदक ने 18 अगस्त 2025 को कार्यालय में स्वयं उपस्थित होकर आवेदन भी दिया, लेकिन फिर भी जानकारी नहीं दी गई।
⚠ नियमों का कथित उल्लंघन
सूचना न देना सीधे तौर पर —
आरटीआई अधिनियम की धारा 6(1)
धारा 6(3)
धारा 7(1)
का उल्लंघन माना जा रहा है।
🔍 भ्रष्टाचार का संदेह गहराया
आवेदक का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा सूचना न देना इस बात की ओर इशारा करता है कि कहीं न कहीं विभागीय कार्यों में वित्तीय अनियमितता और शासन की राशि का दुरुपयोग हुआ है।
सूत्रों के अनुसार छिंदगांव टैंक निर्माण कार्य में करोड़ों की सरकारी राशि के बंदरबांट की आशंका भी जताई जा रही है।
📌 प्रथम अपील भी बेअसर
आवेदक ने नियम के तहत प्रथम अपील भी दायर की, लेकिन विभाग ने आज तक कोई जवाब नहीं दिया, जिससे संदेह और गहरा गया है।
🗣 जनता में सवाल
इस पूरे मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—
विभाग सूचना क्यों छुपा रहा है?
करोड़ों की सरकारी राशि कहां गई?
क्या इसके पीछे बड़े स्तर का भ्रष्टाचार छिपा है?
उच्च अधिकारियों के पत्र के बाद भी अधीनस्थ अधिकारी आदेश का पालन क्यों नहीं कर रहे?
📢 आवेदक की मांग
आर. नागेश्वर ने कहा कि यह मामला अब उच्च स्तरीय जांच का विषय है और वे शीघ्र ही राज्य सूचना आयोग एवं अन्य जांच एजेंसियों के पास शिकायत दर्ज कराएँगे।