नगर निगम अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर कार्यवाही टली, पार्षदों में नाराज़गी

ब्यूरो।। सुनील पांडे, सिंगरौली
नगर निगम सिंगरौली में सियासी उठापटक तेज हो गई है। अध्यक्ष देवेश पाण्डेय के खिलाफ पार्षदों द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर शुक्रवार 3 अक्टूबर को सुनवाई होनी थी, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर इसे आगे बढ़ा दिया गया। इस निर्णय से नाराज़ पार्षदों ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ बताते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
पार्षदों का कहना है कि नगर निगम अधिनियम की धारा 31 के तहत आवेदन प्रस्तुत होने के 10 दिनों के भीतर कार्यवाही पूरी होनी चाहिए, लेकिन शासन-सत्ता के दबाव में कार्रवाई को टाल दिया गया। पार्षदों ने इसे पारदर्शिता और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों पर हमला बताया।
क्या है मामला?
अध्यक्ष देवेश पाण्डेय के खिलाफ पार्षदों ने कलेक्टर एवं विहित प्राधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मध्यप्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 23-क के तहत अविश्वास प्रस्ताव की कार्यवाही करने की मांग की थी। पार्षदों ने अध्यक्ष पर गंभीर कार्यप्रणाली संबंधी आरोप लगाए हैं, जिनमें परिषद की बैठकों में नियमों की अनदेखी और पार्षदों की राय लिए बिना निर्णय लेना प्रमुख है।
03 मार्च 2025 की बैठक को लेकर वार्ड 24 की पार्षद श्रीमती शिवकुमारी ने उच्च न्यायालय जबलपुर में याचिका दायर की थी। न्यायालय ने बैठक को निरस्त कर दिया।
इसी प्रकार 27 मार्च से 07 अप्रैल 2025 तक हुई बैठकों को लेकर वार्ड 15 की पार्षद श्रीमती अर्चना विश्वकर्मा ने याचिका दायर की थी। इस पर 29 अप्रैल 2025 को न्यायालय ने परिषद की कार्यवाही के कई प्रस्तावों पर स्थगन आदेश दिया।
पार्षदों का आरोप है कि अध्यक्ष द्वारा बार-बार नियमों की अनदेखी की जा रही है, जिससे परिषद की कार्यवाही बाधित हो रही है और उनके अधिकारों का हनन हो रहा है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में आगे कब और क्या निर्णय लेता है, क्योंकि मौजूदा स्थिति में नगर निगम अध्यक्ष की कुर्सी खतरे में नजर आ रही है।