टिकट से वंचित, फिर भी संगठन से अटूट नाता—इंद्र शरण सिंह चौहान की सियासी पहचान कायम

भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष ने कहा—“हम पार्टी के अनुशासित सिपाही हैं”, सीधी के विकास और संगठनात्मक मुद्दों पर खुलकर रखी बात

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विशेष रिपोर्ट | सीधी

सीधी। राजनीति में पद और परिस्थितियां बदलती रहती हैं, लेकिन लंबे राजनीतिक सफर से बनी पहचान आसानी से नहीं बदलती। सीधी की राजनीति में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष इंद्र शरण सिंह चौहान ऐसे नेता के रूप में पहचाने जाते हैं, जिन्होंने पार्टी संगठन में विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और जिला अध्यक्ष जैसे अहम दायित्व का भी निर्वहन किया।

विधानसभा चुनाव के दौरान वे विधायक पद के दावेदारों में शामिल रहे, लेकिन टिकट नहीं मिला। इसके बावजूद उन्होंने संगठन से दूरी बनाने के बजाय भाजपा के साथ अपना जुड़ाव और राजनीतिक सक्रियता बनाए रखी। उनका कहना है कि “हम पार्टी के अनुशासित सिपाही हैं।”

टिकट नहीं मिला, लेकिन संगठन से रिश्ता कायम

इंद्र शरण सिंह चौहान का राजनीतिक सफर किसी एक पद या चुनाव तक सीमित नहीं रहा। भाजपा में विभिन्न जिम्मेदारियों पर काम करते हुए उन्होंने संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाई। जिला अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने संगठन को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभाली।

विधानसभा टिकट नहीं मिलने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसका जवाब उनके पास नहीं है और यह राम तथा पार्टी नेतृत्व ही जानते हैं। हालांकि टिकट से वंचित रहने के बाद भी पार्टी संगठन के प्रति उनका जुड़ाव बना हुआ है।

“सीधी का विकास ही प्राथमिकता”

हालिया संवाद के दौरान सीधी के विकास से जुड़े कई मुद्दों पर उनसे सवाल किए गए। एयरपोर्ट, मेडिकल कॉलेज, किसानों की समस्याएं, उद्योग, आवारा मवेशी और विधानसभा टिकट जैसे विषयों पर उन्होंने अपनी बात रखी।

सीधी में एयरपोर्ट शुरू किए जाने के पक्ष में अपनी बात रखते हुए उन्होंने इसे क्षेत्र के विकास और बेहतर आवागमन से जोड़कर देखा। मेडिकल कॉलेज को लेकर उन्होंने सांसद और विधायक द्वारा किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया। उद्योगों के विकास के लिए बेहतर सड़क और आवागमन व्यवस्था को महत्वपूर्ण बताया।

UGC पर न्यायसंगत व्यवस्था की बात

यूनिफॉर्म सिविल कोड (UGC) से जुड़े सवाल पर इंद्र शरण सिंह चौहान ने कहा कि मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि कानून लागू होता है तो शिकायतों की सुनवाई के लिए गठित समिति या बेंच में सभी समाजों के अधिकारियों को प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए। उनके अनुसार इससे व्यवस्था को अधिक न्यायसंगत बनाया जा सकता है।

लंबा संगठनात्मक अनुभव बना पहचान

इंद्र शरण सिंह चौहान की राजनीतिक पहचान को केवल चुनावी टिकट के नजरिए से देखना उनके लंबे संगठनात्मक सफर को सीमित करना होगा। भाजपा में विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने के बाद जिला अध्यक्ष की भूमिका तक पहुंचना उनके संगठनात्मक अनुभव को दर्शाता है।

टिकट की दावेदारी के बावजूद अवसर नहीं मिला, लेकिन उन्होंने संगठन के साथ अपना संबंध बनाए रखा। यही पहलू उनके राजनीतिक सफर में खास तौर पर सामने आता है।

पद से अधिक संगठन से जुड़ाव पर जोर

राजनीति में किसी नेता की पहचान केवल उसके वर्तमान पद से नहीं, बल्कि उसके लंबे सार्वजनिक और संगठनात्मक सफर से भी बनती है। इंद्र शरण सिंह चौहान ने भाजपा में विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए अपनी अलग पहचान बनाई है।

विधायक बनने का अवसर भले ही उन्हें नहीं मिला, लेकिन संगठन के प्रति उनकी सक्रियता और जुड़ाव कायम है। “हम पार्टी के अनुशासित सिपाही हैं” का उनका बयान इसी राजनीतिक रुख को रेखांकित करता है। सीधी की राजनीति में उनका संगठनात्मक अनुभव और सक्रिय भूमिका आगे भी चर्चा का विषय बनी रह सकती है।

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