लटेरी में शिक्षा की किताबें कबाड़ खाने में बिकती पाई गई


जो गरीब बच्चों के लिए शिक्षा विभाग लग रही है चुना बच्चों के लिए नहीं देते हैं किताबें बोल देते हैं अभी किताबें पर्याप्त नहीं आई है और बाकी सवाल यह होता है कि कबाड़ में बोर के बोरे बेचते पाए जाते हैं इनके ऊपर सरकार कार्रवाई क्यों नहीं करते सरकारी स्कूल की किताबें, मामला सामने आने के बाद मचा हड़कंप, शिक्षा विभाग के चौकीदार पर किताबें बेचने का आरोप, कबाड़ खाने में बिकती नजर आई साल 2024 की किताबें, मामला सामने आने के बाद जांच करने पहुंचे अधिकारी।
लटेरी में सरकारी स्कूल की किताबें कबाड़ की दुकान पर बेचने का मामला सामने आया है, मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है, साथी अब शिक्षा विभाग पर सवाल खड़े हो गए हैं, दरअसल लटेरी के एक कबाड़ की दुकान पर सरकारी स्कूल की किताबें पाई गई है, जिसकी सूचना मिलने पर तहसीलदार और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंच कर किताबों को जप्त कर लिया है, साथी मामले की कार्यवाही शुरू कर दी है, मामला सामने आने के बाद न सिर्फ शिक्षा विभाग बल्कि मध्य प्रदेश की मोहन सरकार पर भी सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि सरकार जिन किताबों को पढ़ाकर बच्चों को आईएएस और आईपीएस बनने की कोशिश कर रही है, वह किताबें अब कबाड़ की दुकान पर रद्दी के भाव बिक रही हैं, मामला सामने आने के बाद जिम्मेदार अब मामले को लेकर कार्यवाही का आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि आखिर ऐसा हो क्यों रहा है, क्योंकि ऐसे अनैतिक कार्यों को रोकने के लिए सरकार ना खुद जिम्मेदार है बल्कि सरकार ने जिम्मेदार लोगों को अनैतिक गतिविधियों को रोकने के लिए जिम्मेदारी दी है, जिन्हें सरकार मोटी पगार भी दे रही है, आरोप है कि शिक्षा विभाग के एक चौकीदार द्वारा यह किताबें कबाड़ की दुकान पर बेचने के लिए लाई गई थी, भले ही इस मामले में जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारियो से भागते और मुंह छुपाते नजर आ रहे हो लेकिन यह सबसे बड़ा सवाल है कि चौकीदारी किसके इशारे पर ये सब कर रहा था, प्राथमिक जांच में पाया गया है कि यह किताबे साल 2024 – 25 सत्र की हैं, करीब 100 किताबें कक्षा एक से लेकर आठ तक की एक बोरी में पाई गई हैं, दुर्भाग्य देखिए कि मध्य प्रदेश में कई बच्चों को आज भी पढ़ने के लिए किताबें नहीं मिल पा रही हैं और यहां बच्चों का भविष्य कबाड़ की दुकान पर रद्दी के भाव बिक रहा है।
विदिशा से ब्यूरो चीफ मिट्ठू लाल की रिपोर्ट