राष्ट्र प्रथम की भावना से भाजपा जिला अध्यक्ष तक का सफर संघ के संस्कार से संगठन की जिम्मेदारियों तक पहुंचे

इन्द्रसरण सिंह चौहान, बोले— “पद नहीं, लोककल्याण और राष्ट्रसेवा मेरा उद्देश्य”

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विशेष रिपोर्ट | सीधी
संपादक आर. डी. पाण्डेय
सीधी। पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष इन्द्रसरण सिंह चौहान ने अपने लंबे राजनीतिक एवं सामाजिक सफर को याद करते हुए कहा कि विद्यार्थी जीवन से ही उनके भीतर राष्ट्रप्रेम और समाजसेवा की भावना रही। इसी विचार ने उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जोड़ा और आगे चलकर भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक दायित्वों तक पहुंचाया।
चौहान के अनुसार संघ से मिले संस्कारों ने उनके सार्वजनिक जीवन की दिशा तय की। उनका मानना रहा कि प्रत्येक व्यक्ति को राष्ट्रहित और समाज के कल्याण के लिए अपनी भूमिका निभानी चाहिए। इसी भावना के साथ उन्होंने भाजपा में सक्रिय होकर अलग-अलग संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालीं।
बजरंग दल से शुरू हुआ संगठनात्मक सफर
इन्द्रसरण सिंह चौहान ने बताया कि वर्ष 1991-92 के आसपास वे बजरंग दल के जिला संयोजक रहे। इसके बाद वर्ष 1998 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला महामंत्री की जिम्मेदारी मिली। संगठन में महामंत्री सहित विभिन्न दायित्व निभाने के बाद उन्हें मंडी के डायरेक्टर और पंचायती राज से जुड़े संगठन में भी जिम्मेदारी मिली।
उन्होंने बताया कि नरेंद्र सिंह तोमर और प्रभात झा के कार्यकाल में उन्हें प्रदेश सह-संयोजक तथा बाद में प्रदेश संयोजक की जिम्मेदारी मिली। इसके बाद वे भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष रहे और आगे चलकर भाजपा सीधी के जिला अध्यक्ष का दायित्व संभाला।
चौहान ने कहा कि पद और जिम्मेदारियां बदलती रहीं, लेकिन उनकी मूल भावना लोककल्याण और राष्ट्रसेवा की रही।
सरपंच बने तो गांव के विकास को बनाया प्राथमिकता
संगठनात्मक राजनीति के साथ उन्होंने ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी भी संभाली। चौहान के अनुसार सरपंच बनने के बाद गांव के विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया। उन्होंने तालाब, सड़क और नंदन फल उद्यान जैसे विकास कार्यों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के दौरान कई अड़चनें आईं और कुछ मामले न्यायालय तक भी पहुंचे, लेकिन प्रयास जारी रहे। नंदन फल उद्यान में लगाए गए पेड़ों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज भी वहां पेड़ फल-फूल दे रहे हैं।
“कार्यकर्ता किस गुट का है, यह कभी नहीं पूछा”
पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष ने अपने कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि उनके पास पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आम लोग भी अपनी समस्याएं लेकर आते थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी यह नहीं पूछा कि सामने वाला व्यक्ति किस गुट या राजनीतिक धड़े से जुड़ा है।
उनके अनुसार, “पार्टी का हो या नहीं, मेरे क्षेत्र, मेरे गांव और मेरे जिले का है तो उसके लिए कार्य करना मेरा दायित्व है।”
चौहान समाज की राजनीतिक भागीदारी पर रखी अपनी बात
सीधी विधानसभा में चौहान समाज की राजनीतिक भागीदारी और भाजपा में टिकट के सवाल पर चौहान ने पुराने चुनाव परिणामों का उल्लेख करते हुए अपनी बात रखी।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने पूर्व में राजबली सिंह चौहान को टिकट दिया था, लेकिन वे चुनाव नहीं जीत सके। उनके अनुसार उसी दौर में केदारनाथ शुक्ल और चुरहट से गोविंद मिश्रा भी चुनाव हार गए थे। इसलिए किसी एक चुनाव के परिणाम को केवल जातीय नजरिये से देखना उचित नहीं है।
चौहान ने दावा किया कि बाद के समय में पार्टी के भीतर यह धारणा पहुंची कि सीधी से चौहान प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत सकते। उनके अनुसार ऐसी धारणा के कारण चौहान समाज को राजनीतिक अवसर मिलने में बाधा आई।
पुराने चुनाव परिणामों का दिया उदाहरण
अपने तर्क के समर्थन में चौहान ने जिले के पुराने चुनाव परिणामों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कुंवर अर्जुन सिंह चुरहट और के.के. सिंह भंवर गोपद-बनास से निर्दलीय चुनाव जीत चुके हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव में राव रणबहादुर सिंह की जीत का भी उल्लेख किया।
चौहान ने कहा कि चुनाव परिणाम केवल जातीय समीकरणों से तय नहीं होते। उन्होंने कमलेश्वर पटेल और कमलेश्वर द्विवेदी के चुनाव परिणामों का भी उदाहरण देते हुए कहा कि राजनीतिक परिणामों को व्यापक परिस्थितियों के साथ समझना चाहिए।
“भाजपा सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास लेकर चलती है”
चौहान ने कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग की अपनी राजनीतिक आकांक्षाएं होती हैं और यह स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि भाजपा “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास” के विचार के साथ आगे बढ़ती है।
विधानसभा टिकट के सवाल पर उन्होंने कहा कि टिकट का निर्णय प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व का विषय है। वे स्वयं को पार्टी का कार्यकर्ता मानते हैं और संगठन की ओर से जो भी जिम्मेदारी मिलेगी, उसे निभाना अपना दायित्व मानते हैं।
“आज भी जो बनता है करता हूं, आगे भी करता रहूंगा”
इन्द्रसरण सिंह चौहान के राजनीतिक सफर में संघ से जुड़ाव, बजरंग दल, युवा मोर्चा, पंचायत, मंडी, पंचायती राज, किसान मोर्चा और भाजपा जिला अध्यक्ष जैसे विभिन्न पड़ाव रहे हैं।
चौहान का कहना है कि राजनीतिक पद और परिस्थितियां बदलती रहती हैं, लेकिन कार्यकर्ता का दायित्व बना रहता है। उनका कहना है—“आज भी जो बनता है करता हूं, आगे भी करता रहूंगा।”
उनके अनुसार सार्वजनिक जीवन में पद से अधिक महत्वपूर्ण समाज, संगठन और क्षेत्र के प्रति जिम्मेदारी है।

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