खरीफ फसलों के लिए आवश्यक कृषि परामर्श डिंडौरी : 24 जुलाई 2024

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प्राईड इंडिया न्यूज़ से सतीश कुमार यादव

कृषि विभाग द्वारा जिले में किसानों को खरीफ फसलों हेतु जुलाई माह के लिए कृषि परामर्श दी जा रही है। परामर्श में बताया गया कि किसान धान की फसल के लिए धान की कतार में बुवाई विधि को प्राथमिकता दें। धान की नर्सरी में यदि भुरा धब्बा ब्लास्ट के लक्षण दिखाई दे तो मेन्कोजेब 2.5ग्रा./ली. पानी के हिसाब से घोल बनाकर छिड़काव करें। खेत में पहली मचाई (पडलिंग) के पूर्व लगभग 2 टन अच्छी प्रकार से पकी हुई गोबर खाद देनी चाहिए। उर्वरकों का प्रयोग मृदा परीक्षण के आधार पर करना चाहिए। धान की बौनी प्रजातियों के लिए 100-130 किग्रा नाइट्रोजन, 60 किग्रा फॉस्फोरस ,50 किग्रा पोटाश एवं 25 किग्रा जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें। अनुशंसित उर्वरक मात्रा से नत्रजन की 1/3 व फास्फोरिक तथा पोटाषिक उर्वरकों की सम्पूर्ण मात्रा रोपाई के समय दें। सामान्यतः20-21 दिन पुरानी धान की 2-3 पौध को एक जगह 20 15 से. मी. के अन्तराल पर लगाना चाहिए।
मक्का –
इसी प्रकार से मक्का के लिए बोने के 15-20 दिन बाद डोरा (हो) चलाकर खरपतवार नियंत्रण करना चाहिए। मक्का मे अनुशसित नत्रजन उर्वरक की 1/3 मात्रा यूरिया के रूप में बुआई के 20-25 दिन बाद अवश्य दें। खेतों मे अतिरिक्त वर्षा जल की निकासी हेतु नालियॉ बनाएं। मक्का में फॉल आर्मीवार्म की निगरानी हेतु प्रभावित क्षेत्रों में फसल के अंकुरण पर या उससे पहले 5 फेरोमैन ट्रेप प्रति एकड़ की दर से स्थापित करें। शुरूआत में फसल यदि आर्मीवार्म से प्रभावित हो तो 1.5 नीम के बीज के अर्कया एजेडिरॉक्टिन 1500 पीपीएम/ 5 मि. ली./ली. का पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
मूंग एवं उड़द –
मूंग एवं उड़द के लिए खरपतवार नियंत्रण के लिये फसल की 20-25 दिन की अवस्था पर निंदाई खुरपी या हेंड हो की सहायता से करें। जल निकासी की उचित व्यवस्था रखें।
अरहर –
अरहर की बुवाई के लिए मेड़ विधि को प्राथमिकता दे जिससे अच्छी उपच प्राप्त हो सके। फसल में खरपतवार नियंत्रण हेतु बुवाई के बाद व अंकुरण के पूर्व खरपतवारनाशी पेन्डीमेथिलीन 2.5-6 ली./हे. की दर से 600-800 ली पानी में घोल बनाकर उपयोंग करें। बुवाई के 20-25 दिन बाद खरपतवार नियंत्रण हेतु निराई हेन्ड हो या खुरपी के माध्यम से करें तथा सघन पौधे को निकाल देना चाहिए। जल निकासी की उचित व्यवस्था रखें।
सोयाबीन –
सूखे/अतिवृष्टि से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए सोयाबीन की बुवाई बी.बी.एफ. या रिज एवं फरों पद्धति से करें। सोयाबीन की फसल में खरपतवार नियंत्रण हेतु 15-20 दिन की अवस्था पर इमेंझेथापायर खरपतवारनाषी का 1 ली./हे. की दर से 750 ली. पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। छिड़काव हेतु फ्लेट फैन अथवा फ्लड जेट नोजल के द्वारा ही किया जाना चाहिए। फसल में नीला भृंग (ब्लू बीटल ) का प्रकोप दिखाई देने पर कीटनाषक क्वीनॉलफॉस 1.5 ली./हे. का छिड़काव नियंत्रण हेतु करें।
मौसम पर आधारित विशेष सलाह एवं उपाय –
खेत से अतिरिक्त पानी के निकास की व्यवस्था करें। इसके लिए जल निकास से लिए बनायी गई नालियों से मिट्टी हटाते रहें, जिससे खेत का पानी बाहर निकल सके।

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