NEET काउंसलिंग में कथित EWS फर्जीवाड़े की उच्चस्तरीय जांच हो, पूरी काउंसलिंग रद्द कर पुनः पारदर्शी काउंसलिंग कराई जाए : राम चरण सोनी

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सीधी 29 अगस्त

मध्यप्रदेश में NEET की काउंसलिंग प्रक्रिया में EWS श्रेणी के कथित अपात्र एवं फर्जी प्रमाण पत्रों के उपयोग का मामला सामने आने के बाद मेडिकल प्रवेश व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अगर अपात्र अभ्यर्थियों को EWS का लाभ देकर मेडिकल सीटें आवंटित की गई हैं, तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि पात्र OBC सहित अन्य वर्गों के विद्यार्थियों के अधिकार और उनके डॉक्टर बनने के सपने पर सीधा आघात है। आम आदमी पार्टी मध्यप्रदेश के प्रदेश सचिव राम चरण सोनी ने कहा कि सरकार इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए NEET काउंसलिंग को तत्काल स्थगित कर उसकी उच्चस्तरीय जांच कराए और अनियमितता प्रमाणित होने पर वर्तमान काउंसलिंग रद्द कर पारदर्शी तरीके से पुनः काउंसलिंग कराए।

सीधी के एक मामले ने खड़े किए गंभीर सवाल

सोनी ने कहा कि उनके संज्ञान में सीधी जिले के करौंदिया निवासी अभिनव मिश्रा का एक मामला आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनके पिता अमित मिश्रा वर्ग-2 शिक्षक हैं और उनकी मासिक आय लगभग ₹81 हजार, यानी वार्षिक आय लगभग ₹9.75 लाख बताई जा रही है। इसके बावजूद अभिनव मिश्रा के नाम से EWS प्रमाण पत्र जारी होने और उसके आधार पर NEET काउंसलिंग में लाभ मिलने का आरोप है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अभ्यर्थी का क्रमांक 733 तथा श्यामशाह मेडिकल कॉलेज रीवा की काउंसलिंग में सीरियल नंबर 710 बताया जा रहा है।

राम चरण सोनी ने कहा कि यह तथ्य आरोप मात्र नहीं रहने चाहिए—सरकार दस्तावेजों की जांच कर दूध का दूध और पानी का पानी करे। यदि जांच में EWS प्रमाण पत्र नियमों के विपरीत पाया जाता है तो प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया से लेकर उसके आधार पर मिले प्रवेश तक की पूरी जांच होनी चाहिए।

OBC छात्रों के अधिकार पर सवाल

राम चरण सोनी ने कहा- “एक-एक मेडिकल सीट किसी विद्यार्थी के वर्षों की मेहनत, संघर्ष और उसके परिवार के सपनों से जुड़ी होती है। अगर किसी अपात्र व्यक्ति ने गलत तरीके से EWS का लाभ लेकर सीट हासिल की है, तो उस सीट के लिए पात्र OBC विद्यार्थी के साथ कितना बड़ा अन्याय हुआ होगा, इसकी कल्पना की जा सकती है।” उन्होंने कहा कि EWS का उद्देश्य आर्थिक रूप से पात्र विद्यार्थियों को अवसर देना है, न कि फर्जी या अपात्र प्रमाण पत्रों के जरिए मेडिकल सीट हासिल करना। अगर प्रमाण पत्रों में हेराफेरी हुई है तो यह उन हजारों मेहनती विद्यार्थियों के साथ अन्याय है जो निर्धारित पात्रता के बावजूद सीट से वंचित रह सकते हैं।

AAP की स्पष्ट मांग—काउंसलिंग रद्द कर दोबारा कराई जाए

आम आदमी पार्टी ने सरकार के सामने मांग रखी है कि— मध्यप्रदेश NEET काउंसलिंग की पूरी प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। काउंसलिंग में लगाए गए सभी EWS प्रमाण पत्रों का आय एवं संपत्ति संबंधी मूल सरकारी रिकॉर्ड से सत्यापन कराया जाए। कितने विद्यार्थियों ने EWS के आधार पर प्रवेश लिया और उनमें से कितने वास्तव में पात्र हैं, इसकी सूची सार्वजनिक की जाए। अपात्र/फर्जी EWS प्रमाण पत्र पाए जाने पर संबंधित प्रवेश की वैधानिक समीक्षा की जाए। प्रमाण पत्र जारी करने में लापरवाही या मिलीभगत पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों और अन्य दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। यदि व्यापक अनियमितता सामने आती है तो NEET काउंसलिंग रद्द कर पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से दोबारा कराई जाए। प्रभावित OBC एवं अन्य पात्र विद्यार्थियों के अधिकारों की भरपाई सुनिश्चित की जाए।

राम चरण सोनी ने कहा- “सरकार यह बताए कि अगर EWS के नाम पर अपात्र लोगों को मेडिकल सीटें दी गईं तो जिन OBC छात्रों की सीटें चली गईं, उनके भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा? गरीब और मेहनती विद्यार्थियों के सपनों की कीमत पर किसी को मेडिकल कॉलेज में प्रवेश नहीं मिलना चाहिए।” उन्होंने चेतावनी दी कि EWS प्रमाण पत्रों की जांच में यदि बड़े पैमाने पर अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों को बचाने के बजाय पूरी जवाबदेही तय करनी होगी।

“आरक्षण का अधिकार किसी की कृपा नहीं है। पात्र विद्यार्थी का अधिकार छीनकर अपात्र को लाभ देना स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार जांच करे, सच सामने लाए और दोषियों पर कार्रवाई करे- वरना आम आदमी पार्टी विद्यार्थियों के अधिकारों की आवाज मजबूती से उठाएगी।”

 

सादर प्रकाशनार्थ

राम चरण सोनी

प्रदेश सचिव

आम आदमी पार्टी मध्यप्रदेश

मो. 9993450159

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