कृषक कल्याण वर्ष 2026 : डिंडौरी की महिला कृषक मोहती दीदी बनीं प्रेरणा की मिसाल

कृषक कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत जिले की महिला कृषक मोहती दीदी ने प्राकृतिक एवं पारंपरिक खेती को अपनाकर आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की प्रेरक मिसाल प्रस्तुत की है। ग्राम नारायणडीह की निवासी मोहती दीदी अपने तीन बच्चों और पति कृष्णपाल के साथ रहती हैं। परिवार की आर्थिक परिस्थितियों और पति के रोज़गार के सिलसिले में अक्सर घर से दूर रहने की स्थिति को देखते हुए उन्होंने अपनी लगभग आधा एकड़ भूमि पर प्राकृतिक एवं पारंपरिक खेती की शुरुआत की।
मोहती दीदी ने रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के स्थान पर प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते हुए खेती की नई राह अपनाई। उनकी मेहनत और लगन का परिणाम यह रहा कि उन्हें खेती से अच्छा लाभ मिलने लगा। इसके साथ ही उन्होंने अपने आसपास के किसानों को भी प्राकृतिक एवं पारंपरिक खेती के लिए प्रेरित किया। उनके प्रयासों से ग्राम नारायणडीह में कई किसान इस पद्धति से जुड़ चुके हैं और अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त कर रहे हैं।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलने से गांव के किसानों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर आय के अवसर मिल रहे हैं, जिससे ग्रामीणों का पलायन भी कम हुआ है। मोहती दीदी का यह प्रयास न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर रहा है, बल्कि पारंपरिक कृषि पद्धतियों को पुनर्जीवित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
प्राकृतिक खेती का उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग को कम करते हुए पर्यावरण के अनुकूल एवं स्वास्थ्यवर्धक खाद्य उत्पादन को बढ़ावा देना है। मोहती दीदी ने इस दिशा में उल्लेखनीय पहल करते हुए यह सिद्ध कर दिया है कि सीमित संसाधनों में भी नवाचार और मेहनत के बल पर खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है।
आज मोहती दीदी की सफलता अन्य महिला किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी है। उनका यह प्रयास न केवल जिले बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।