Janmashtami 2021: फलादेश सुनने के लिए हर साल बनाई जाती है श्रीकृष्ण की कुंडली

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Janmashtami 2021: भगवान परशुराम आठ, श्रीराम 12 कलाओं में पारंगत थे, लेकिन श्रीकृष्ण 16 कलाओं के ज्ञाता थे। आखिर वे कौन से ग्रह, नक्षत्र, लग्न और घड़ी थी जो उन्हें सर्वाधिक कलाओं में पारंगत बनाते हैं, नई पीढ़ी को इसका ज्ञान कराने के लिए द्वापर युग में हुए कृष्ण के जन्म समय, ग्रह और नक्षत्र के आधार पर हर साल कुंडली बनाई जाती है। यह रोचत परंपरा मध्य प्रदेश के विदिशा शहर के प्राचीन व्यंकटेश बालाजी मंदिर में करीब 150 वर्षों से चली आ रही है।

250 साल पुराने इस मंदिर के मठाधीश 80 वर्षीय पं. कैलाश नारायण चतुर्वेदी बताते हैं कि मानव जीवन के लिए भगवान कृष्ण सबसे आदर्श पुरुष हैं। उनके जीवन से जुड़ी हर घटना लोगों को सही राह दिखाने वाली होती है। ज्योतिष शास्त्र में इसका कारण श्रीकृष्ण के जन्म समय वाले अनूठे ग्रह और नक्षत्र थे। यही वजह है कि श्रीकृष्ण की जन्म कुंडली ज्योतिष के विद्वानों के लिए आज भी शोध का विषय बनी हुई है।

परिवार के बुजुर्गों ने बताया कि श्रीकृष्ण की जन्म कुंडली की महत्ता बताने के लिए मंदिर में जन्मोत्सव पर हर साल कुंडली बनाने की शुरुआत हुई थी। ऐसी मान्यता है कि कुंडली का फलादेश सुनने से जीवन की ग्रह बाधाएं दूर होती हैं, इसलिए हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु फलित सुनने के लिए आते हैं।

पिछले 50 वर्षों से श्रीकृष्ण की जन्म कुंडली बनाने वाले पुजारी 75 वर्षीय पं. श्याम चतुर्वेदी बताते हैं कि भगवान के जन्मोत्सव पर रात 12 बजे पूजन के बाद लकड़ी के पटिया पर चाक-मिट्टी से कुंडली बनाई जाती है। इसमें द्वापर युग में कृष्ण का जन्म जिन ग्रह, नक्षत्रों में हुआ था, उनको ही आधार माना जाता है।

अगले दिन सुबह मंदिर में मंगल आरती और बाल श्रंगार के बाद फलित का वाचन किया जाता है। यह कुंडली एक माह तक मंदिर में सुरक्षित रखी जाती है। 80 वर्षीय प्रकाश नारायण भार्गव बताते हैं कि वे बीते साठ वर्षों से हर जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की कुंडली का फलित वाचन सुनते आ रहे हैं।

 

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