30 मासूमों की मौत पर सियासत नहीं, न्याय की लड़ाई: कमलेश्वर पटेल

रीवा के न्याय सत्याग्रह में पूर्व मंत्री ने उठाई आवाज, स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे समेत पीड़ित परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग
रीवा। मध्य प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस कार्य समिति (CWC) सदस्य कमलेश्वर पटेल ने रीवा में आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया के नेतृत्व में चल रहे अनिश्चितकालीन “न्याय सत्याग्रह” में शामिल होकर बालाघाट जिले में बैगा आदिवासी समुदाय के 30 मासूम बच्चों की मौत के मामले को लेकर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला।
सत्याग्रह स्थल पर जनसमूह को संबोधित करते हुए कमलेश्वर पटेल ने कहा कि 30 मासूम बच्चों की मौत को महज एक दुर्घटना मानकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता। यह घटना प्रदेश की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था और गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के साथ अन्याय किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पटेल ने आरोप लगाया कि सरकार समय रहते आदिवासी क्षेत्रों में आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में विफल रही। स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण निर्दोष बच्चों की जान चली गई। उन्होंने कहा कि आदिवासी अंचलों में स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है और इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
पीड़ित परिवारों के लिए बड़ी मांगें
कमलेश्वर पटेल ने सरकार के सामने पीड़ित परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी तथा प्रभावित लोगों को समुचित एवं निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराने की मांग रखी। इसके साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के इस्तीफे की भी मांग की।
उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि आदिवासी समाज और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए है। जब तक न्याय नहीं मिलता और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक अनिश्चितकालीन संघर्ष जारी रहेगा।
पटेल ने कहा कि कांग्रेस आदिवासी समाज के अधिकारों और हितों की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक पूरी मजबूती के साथ लड़ती रहेगी।