पड़रिया खुर्द की आंगनबाड़ियों में बच्चों के भोजन को लेकर सवाल, शिकायत के बाद भी जांच का इंतजार

ग्रामीणों का आरोप—मेन्यू के अनुसार नहीं मिल रहा नाश्ता-भोजन, करीब 15 दिनों तक भोजन बंद रहने का भी दावा; बोले- शिकायतकर्ताओं के सामने हो जांच
जिला ब्यूरो मनोज कुमार यादव
डिंडोरी/शहपुरा। जनपद पंचायत शहपुरा अंतर्गत ग्राम पंचायत पड़रिया खुर्द के आंगनबाड़ी एवं मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को दिए जाने वाले नाश्ते और भोजन को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि केंद्रों में शासन द्वारा निर्धारित मेन्यू के अनुसार बच्चों को नाश्ता और भोजन उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। इसके अलावा भोजन में सूखे आम के टुकड़े (अंमकड़ियां) डालकर बच्चों को भोजन दिए जाने का आरोप भी ग्रामीणों ने लगाया है।
ग्रामीणों के अनुसार, करीब 15 दिनों तक बच्चों का भोजन बंद रहा। उनका कहना है कि शासन स्तर से आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के नाश्ते एवं भोजन के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाती है, इसके बावजूद निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन नहीं मिलने की स्थिति गंभीर सवाल खड़े करती है।

एसडीएम और परियोजना अधिकारी को दिया लिखित आवेदन
मामले को लेकर ग्रामीणों ने एसडीएम राजस्व शहपुरा एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी शहपुरा को लिखित शिकायत देकर जांच की मांग की है। ग्रामीणों ने अपनी शिकायत में कथित अनियमितताओं की जांच कराने के साथ ही यह मांग भी रखी है कि जांच उनकी मौजूदगी में कराई जाए, ताकि मौके की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत अधिकारियों तक पहुंचने के बावजूद अभी तक मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। उनका कहना है कि बच्चों के भोजन से जुड़ी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच कराई जानी चाहिए।
ग्रामीण बोले- शिकायतकर्ताओं के सामने हो जांच
ग्रामीणों की मांग है कि पड़रिया खुर्द के सभी आंगनबाड़ी एवं मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों का अचानक निरीक्षण कराया जाए। जांच के दौरान भोजन सामग्री का स्टॉक, वितरण रजिस्टर, मेन्यू चार्ट, भोजन की गुणवत्ता तथा बच्चों को दिए जा रहे नाश्ते और भोजन का भौतिक सत्यापन कराया जाए।
साथ ही करीब 15 दिनों तक भोजन बंद रहने के आरोप की भी जांच कराने की मांग की गई है।
बच्चों के पोषण से जुड़ा मामला, इसलिए जांच जरूरी
आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से छोटे बच्चों को पोषणयुक्त नाश्ता एवं भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था शासन द्वारा की गई है। ऐसे में भोजन की गुणवत्ता अथवा निर्धारित मेन्यू के पालन में किसी भी प्रकार की अनियमितता बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ा गंभीर विषय हो सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि केंद्रों में सभी व्यवस्थाएं नियमों के अनुसार संचालित हो रही हैं, तो शिकायतकर्ताओं की मौजूदगी में जांच कराने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उनका कहना है कि पारदर्शी जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और यदि आरोप गलत हैं तो यह भी सामने आ जाएगा।
अब प्रशासन की जांच पर टिकी निगाहें
ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराकर शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता सामने लाने की मांग की है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और जांच के बाद बच्चों के भोजन को लेकर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई सामने आती है।
नोट: खबर में लगाए गए अनियमितता एवं विभागीय लापरवाही से संबंधित आरोप ग्रामीणों की शिकायत पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित विभागीय अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना आवश्यक है।