नेल्सन मंडेला इंटरनेशनल पीस अवार्ड 2026 से सम्मानित डाॅ मुन्नालाल देवदास

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– डाॅ देवदास के 42 वर्षों की सेवा साधना समर्पण का सम्मान –

– 1983 से 2026 तक संघर्ष से सफलता की ओर बढते कदम

गोल्डन ईरा बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य के कोपरा नगर निवासी राष्ट्रपति व राज्यपाल पुरस्कृत सेवानिवृत्त प्रधान पाठक, कवि ,लेखक, साहित्यकार वरिष्ठ समाजसेवी डाॅ मुन्नालाल देवदास को जनहित में 42 वर्षों की सेवा साधना और समर्पण के लिए नेल्सन मंडेला इंटरनेशनल पीस अवार्ड 2026 से सम्मानित किया गया ।

इस संदर्भ में बताना चाहेंगे कि डाॅ देवदास ने अपने जीवन की हर विषम परिस्थिति से संघर्ष किया, कभी हार नहीं माना। उनकी सफलता का मूलमंत्र है सेवा साधना और समर्पण। इस मंत्र को जो भी व्यक्ति अपनाएगा वह सफलता के शिखर तक जाएगा। उनकी कहानी अद्वितीय अविस्मरणीय और प्रेरणादायी है।

उपसरपंच से शिक्षक बने –
डाॅ देवदास विद्यार्थी जीवन के साथ 1983 से जून 1987 तक ग्राम पंचायत कोपरा के निर्वाचित उपसरपंच रहकर जनसेवा किए। फिर 15 जुलाई 1987 से 30 अप्रैल 2023 तक 36 साल स्वतंत्रता सेनानी ग्राम कौन्दकेरा में ही निष्ठापूर्वक शिक्षकीय सेवाएं किए । फलस्वरूप 2007 में राष्ट्रपति पुरस्कार और कोरोना काल 2020 में राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित हुए।

30 पुस्तकों का प्रकाशन –
डाॅ देवदास की 2001 से 2026 तक 30 पुस्तकें प्रकाशित हुई है। जिसमें तीन पुस्तकों को वर्ल्ड रिकॉर्ड मिला है- 1 राष्ट्रीय आंदोलन और प्रभात भजन के 75 साल (कोपरा) 2 ऐतिहासिक पैरी नदी परिक्रमा ( सिरकट्टी आश्रम ) और 3 श्यामनगर में सामूहिक राष्ट्रगान की अनूठी परम्परा।

3 पद्मश्री सिंगरों से 3 भक्ति गीत मुंबई जाकर गवाए –

डाॅ देवदास अनेक हिन्दी और छत्तीसगढी भक्ति गीत लिखे हैं। जिनमें छत्तीसगढ़ की बेटी कौशल्या माता पर केन्द्रित 3 भक्ति गीतों को भारत के 3 पद्मश्री सिंगर अनूप जलोटा, अनुराधा पौडवाल और सुरेश वाडेकर से गवाए । तीनों भक्ति गीतों को वर्ल्ड फेमस टी सीरीज मुंबई ने रिलीज किया। इस उपलब्धि को श्री दादा साहब फाल्के बुक आफ रिकार्ड और डिस्कवरी बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड से सम्मानित किया गया है।

2006 से 2026 नवाचार का सफर –
दिसम्बर 2006 में राष्ट्रीय शैक्षिक नवाचार कान्फ्रेंस लोनावाला महाराष्ट्र में हुआ। जहाँ डाॅ देवदास ने छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करते हुए अंकों से अक्षर बनाने की मौलिक विधि का प्रदर्शन किया। उसे सर रतन टाटा इनोवेटिव टीचर अवार्ड मिला। फिर 2026 तक नवाचार और वर्ल्ड रिकॉर्ड का सिलसिला बढ़ते गया। 2025 में यू के बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड ने डाक्टर आफ इनोवेशन मानद उपाधि से सम्मानित किया।

पितर मानस महोत्सव के प्रेरणास्त्रोत –
डाॅ देवदास की मानस यात्रा बहुत रोचक है। वे 25.5.2014 को मम राजीव लोचन जिला मानस संघ गरियाबंद की स्थापना करके मानस मंडलियों को संगठित किए। 2015 में वे श्री तुलसी मानस प्रतिष्ठान छत्तीसगढ़ के प्रांतीय उपाध्यक्ष मनोनीत हुए। इसी कड़ी में 2019 में कौशल्या माता मंदिर चंदखुरी में पितर मानस महोत्सव मनाने की नई परंपरा शुरू किए । यह पितर मानस महोत्सव पितर पक्ष में छत्तीसगढ़ के बलिदानी पूर्वजों को सामूहिक श्रद्धांजलि देने के लिए प्रतिवर्ष मनाया जाता है।
इस तरह डाॅ देवदास का जीवन छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति शिक्षा साहित्य, नवाचार, श्रीराम चरित मानस के प्रचार प्रसार और समाजसेवा के लिए सदैव समर्पित रहा है। जिसके कारण उन्हें गोल्डन ईरा बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड द्वारा नेल्सन मंडेला इंटरनेशनल पीस अवार्ड 2026 से सम्मानित किया गया है।

डाॅ देवदास को इस उपलब्धि के लिए विभिन्न शैक्षिक, सामाजिक, साहित्यिक संस्थाओं, तुलसी मानस प्रतिष्ठान, जिला मानस संघों और शिक्षा प्रकोष्ठ गरियाबंद के सभी पदाधिकारियों व सदस्यों ने हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी है।

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