सफलता की कहानी-समूह से जुड़कर बदली जिंदगी, आज ट्रैक्टर से सशक्त बना रहीं आजीविका की राह
स्व-सहायता समूह और आजीविका मिशन के सहयोग से श्रीमती सीता बाई मरावी बनीं आत्मनिर्भर स्व-सहायता समूह और आजीविका मिशन के सहयोग से श्रीमती सीता बाई मरावी बनीं आत्मनिर्भर

रिपोर्टर-सोहन श्याम
डिंडौरी- मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, डिण्डौरी महिलाओं को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। मिशन से जुड़कर अनेक महिलाओं ने न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि समाज में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। ऐसी ही प्रेरणादायी कहानी है विकासखण्ड डिण्डौरी के ग्राम धौरई निवासी श्रीमती सीता बाई मरावी की है।
श्रीमती सीता बाई मरावी वर्ष 2013 में माँ कल्याणी आजीविका स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। उस समय परिवार की आजीविका मजदूरी पर निर्भर थी। मेहनत के बावजूद आय सीमित होने से परिवार का भरण-पोषण और बच्चों की पढ़ाई में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बचत शुरू की तथा आजीविका मिशन से प्राप्त वित्तीय सहायता और ऋण का उपयोग कृषि कार्यों को बेहतर बनाने में किया।
मिशन द्वारा उन्हें उन्नत कृषि एवं जैविक खेती का प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान को उन्होंने अपनी खेती में अपनाया, जिससे उत्पादन और आय में वृद्धि हुई। इसके बाद स्व-सहायता समूह के माध्यम से प्राप्त ऋण से उन्होंने कृषि कार्यों के विस्तार का निर्णय लिया और ट्रैक्टर खरीदा।
आज श्रीमती सीता बाई मरावी अपने ट्रैक्टर के माध्यम से स्वयं के खेतों के साथ-साथ गांव के अन्य किसानों को भी कृषि कार्यों में सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। इससे उन्हें प्रतिदिन लगभग 500 से 600 रुपये तक की आय होने लगी। बढ़ी हुई आमदनी से उन्होंने समूह का ऋण समय पर ब्याज सहित चुका दिया तथा अपने बच्चों की शिक्षा और परिवार की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा कर रही हैं।
श्रीमती सीता बाई मरावी का कहना है कि यदि वे स्व-सहायता समूह और आजीविका मिशन से नहीं जुड़तीं, तो आज यह परिवर्तन संभव नहीं हो पाता। मिशन के सहयोग से उन्होंने आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का उदाहरण प्रस्तुत किया है।
श्रीमती सीता बाई मरावी की सफलता इस बात का प्रमाण है कि स्व-सहायता समूह, नियमित बचत, प्रशिक्षण और समय पर वित्तीय सहयोग के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाकर आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण की नई मिसाल कायम कर सकती हैं।