पेयजल संकट से फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, खाली बर्तन रखकर 

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किया चक्काजाम

 

जिला ब्यूरो मनोज कुमार यादव

 

डिंडोरी। एक ओर सरकार हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के दावे कर रही है, वहीं जनपद पंचायत डिंडोरी की ग्राम पंचायत रकरिया में हकीकत इन दावों को आईना दिखाती नजर आ रही है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि पानी की एक-एक बूंद के लिए जूझ रही महिलाओं, बच्चों और ग्रामीणों को सड़क पर उतरकर आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

 

ग्राम पंचायत रकरिया के बाजार टोला में पेयजल संकट से परेशान ग्रामीणों ने रकरिया-चौरा-छिंदगांव मुख्य मार्ग पर खाली बर्तन रखकर चक्काजाम कर दिया। घंटों तक सड़क पर आवागमन बाधित रहा और प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आया।

 

ग्रामीण महिलाओं का आरोप है कि पंचायत द्वारा 4 जून से टैंकर के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन टैंकर का लाभ पूरे गांव को नहीं मिल पा रहा है। महिलाओं का कहना है कि टैंकर अधिकतर समय सरपंच के घर के पास खड़ा रहता है, जिससे अन्य मोहल्लों के लोगों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता। नतीजा यह है कि लोग भीषण गर्मी में प्यास और परेशानी झेलने को मजबूर हैं।

 

ग्रामीणों ने बताया कि गांव के हैंडपंप और कुएं लगभग जवाब दे चुके हैं। अधिकांश जल स्रोत सूख चुके हैं और जो कुछ बचे हैं उनमें भी पानी नाममात्र का है। लोगों को करीब डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित कुएं से पानी लाना पड़ रहा है। विडंबना यह है कि वह पानी भी न तो साफ है और न ही पीने योग्य, लेकिन मजबूरी में उसी से परिवार का गुजारा किया जा रहा है।

 

जब इस मामले में ग्राम पंचायत की सरपंच सुशीला बाई मरावी का पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उनके घर पर मौजूद बच्चों ने बताया कि सरपंच घर पर नहीं हैं। इससे ग्रामीणों में और नाराजगी देखने को मिली।

 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब गर्मी के मौसम में जल संकट की आशंका पहले से थी, तो पंचायत और जिम्मेदार विभागों ने वैकल्पिक व्यवस्था समय रहते क्यों नहीं की? करोड़ों रुपये की जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं के बावजूद यदि ग्रामीणों को सड़क जाम कर पानी मांगना पड़ रहा है, तो यह केवल स्थानीय व्यवस्था की नहीं बल्कि पूरे तंत्र की विफलता को उजागर करता है।

 

पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए महिलाओं और बच्चों का सड़क पर उतरना बताता है कि योजनाओं की चमकदार रिपोर्टों और जमीनी हकीकत के बीच कितना बड़ा अंतर है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस आंदोलन को केवल एक दिन की घटना मानकर भूल जाता है या फिर रकरिया के प्यासे लोगों को स्थायी समाधान देने की दिशा में ठोस कदम उठाता है।

 

“जब जनता को पानी के लिए सड़क जाम करना पड़े, तो समझ लीजिए समस्या सिर्फ पानी की नहीं, व्यवस्था की भी है।”अन्य संभावित हेडिंग:

 

पानी के लिए सड़क पर उतरे ग्रामीण, रकरिया में खाली बर्तनों के साथ चक्काजाम

 

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प्यासे गांव का प्रदर्शन: डेढ़ किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर ग्रामीण

 

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