भंवरखोह विद्यालय में शिक्षकों की उपस्थिति पर सवाल, प्रधानाध्यापक 10:30 बजे और अतिथि शिक्षक 11 बजे पहुंचे
विद्यार्थियों का आरोप—हम समय पर आते हैं, शिक्षक नहीं; निर्धारित समय पर प्रार्थना भी नहीं होने की बात आई सामने

प्राइड कदम समाचार, सीधी
सीधी। जिले के आदिवासी विकासखंड कुसमी के भुईमाड़ संकुल अंतर्गत शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय भंवरखोह में शिक्षकों की समय पर उपस्थिति को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। मंगलवार को स्थानीय संवाददाता की पड़ताल के दौरान विद्यालय में निर्धारित समय पर अधिकांश शिक्षक उपस्थित नहीं मिले। इस स्थिति ने ग्रामीण अंचलों में शिक्षा व्यवस्था और विद्यालय के नियमित संचालन को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विद्यालय के प्रधानाध्यापक नराकन प्रसाद जायसवाल लगभग सुबह 10:30 बजे विद्यालय पहुंचे, जबकि अतिथि शिक्षक राजू साकेत के करीब 11 बजे पहुंचने की बात सामने आई। अन्य शिक्षक-शिक्षिकाओं की उपस्थिति भी सुबह 11 बजे तक नहीं होने की जानकारी मिली। विद्यालय में तीन नियमित शिक्षक और एक अतिथि शिक्षक पदस्थ बताए गए हैं। हालांकि, सभी शिक्षकों की उपस्थिति और अनुपस्थिति की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही हो सकेगी।
बच्चों ने कहा—हम समय पर आते हैं, शिक्षक नहीं
विद्यालय में अध्ययनरत तीसरी कक्षा की छात्रा अंजनी यादव ने बताया कि बच्चे समय पर विद्यालय पहुंच जाते हैं, लेकिन शिक्षक समय पर नहीं आते। विद्यालय में निर्धारित समय पर प्रार्थना नहीं कराए जाने की बात भी सामने आई है।
छात्रा के अनुसार, विद्यालय की एक चाबी बच्चों के पास रखवाई जाती है, जबकि दूसरी चाबी एक शिक्षक के पास रहती है। यदि ऐसा नियमित रूप से किया जा रहा है, तो यह व्यवस्था भी जांच का विषय है। विद्यालय खोलने, प्रार्थना कराने और निर्धारित समय पर कक्षाएं संचालित करने की जिम्मेदारी की पड़ताल आवश्यक है।
शिक्षक ने मौखिक निर्देश मिलने की बात कही
विद्यालय के शिक्षक रामचंद्र साकेत ने बताया कि प्राचार्य सोनगढ़ और जनशिक्षक भुईमाड़ राजबहादुर सिंह द्वारा उन्हें एक दिन प्राथमिक शाला पहाड़टोला में सेवाएं देने के लिए मौखिक रूप से कहा गया था। शिक्षक के अनुसार, इस संबंध में उन्हें कोई लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुआ।
ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि संबंधित शिक्षक को किस आधार पर दूसरे विद्यालय में सेवा देने के निर्देश दिए गए थे और क्या इस व्यवस्था की जानकारी संबंधित अधिकारियों को थी।
दूरस्थ अंचल में शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
आदिवासी बहुल और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यार्थियों को नियमित शिक्षा उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। ऐसे में शिक्षकों की समय पर उपस्थिति, प्रार्थना सभा का नियमित आयोजन और निर्धारित समयानुसार कक्षाओं का संचालन सुनिश्चित करना शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है।
भंवरखोह विद्यालय में सामने आई स्थिति के बाद अब संबंधित अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। आवश्यकता है कि विद्यालय की उपस्थिति पंजिका, शिक्षकों के आगमन के समय, शैक्षणिक गतिविधियों और दूसरे विद्यालय में सेवा देने संबंधी मौखिक निर्देशों की निष्पक्ष जांच की जाए।
अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग के अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और जांच के बाद क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल, संबंधित अधिकारियों का पक्ष और विभागीय जांच के निष्कर्ष सामने आने बाकी हैं।