बैगा बहुल्य क्षेत्र की लखपति दीदी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

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रिपोर्टर-सोहन श्याम बजाग डिंडौरी

 

डिंडौरी -जिला डिंडोरी के विकासखंड समनापुर अंतर्गत ग्राम धुरकुटा की निवासी श्रीमती सोनिया कुसरिया आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं। नारी शक्ति आजीविका महासंघ बम्हनी से जुड़कर उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कीए बल्कि अपने पूरे परिवार को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 

श्रीमती सोनिया कुसरिया वर्ष 2011 में बाजारटोला स्व.सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने से पहले उनकी आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर थी। परिवार का पालन-पोषण मजदूरी से होने वाली 3500 से 3800 रुपये मासिक आय पर निर्भर थाए जिससे घर चलाना कठिन हो रहा था।

समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आजीविका मिशन के माध्यम से विभिन्न चरणों में ऋण सहायता प्राप्त हुई। प्रारंभ में आरएफ राशि से 5000 रुपये का ऋण लेकर कृषि कार्य शुरू किया। इसके बाद सीआईएफ एवं सीसीएल के माध्यम से प्राप्त राशि का उपयोग उन्होंने टेंट व्यवसाय शुरू करने और उसे विस्तार देने में किया। मेहनत और लगन के बल पर उनका व्यवसाय लगातार बढ़ता गया।

आज श्रीमती सोनिया कुसरिया टेंट व्यवसाय के साथ-साथ राइस मिल ऑयल मिल एवं तूफान वाहन जैसी सामूहिक गतिविधियों से भी जुड़ी हुई हैं। वर्तमान में उनकी मासिक आय लगभग 15 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है तथा वार्षिक आय लगभग 1 लाख 80 हजार रुपये से अधिक हो गई है।

समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया। उन्होंने मजदूरी छोड़कर अपना पक्का मकान बनाया तथा परिवार को बेहतर जीवन प्रदान किया। उनके पुत्र गणेश कुसरिया ने आरसेटी से प्रशिक्षण प्राप्त कर वाहन चालक के रूप में कार्य शुरू किया, जिससे परिवार को प्रतिमाह 8 से 10 हजार रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।

श्रीमती सोनिया कुसरिया की सफलता यह साबित करती है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शनए अवसर और सहयोग मिले तो वे आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार एवं समाज की दिशा बदल सकती हैं। उनकी यह कहानी आजीविका मिशन एवं स्व-सहायता समूहों की सफलता का जीवंत उदाहरण है।

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