सिलाई सेंटर से आत्मनिर्भर बनीं आरती दीदी बदल दी परिवार की तस्वीर

0 293

रिपोर्टर-सोहन श्याम बजाग डिंडौरी

 

बजाग-जिला डिंडौरी के विकासखंड बजाग अंतर्गत ग्राम पंचायत पड़रिया डोंगरी की निवासी श्रीमती आरती बर्मन आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। रेवा आजीविका स्वसहायता समूह से जुड़कर उन्होंने अपने हुनर को पहचान दी और मेहनत के बल पर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की।

श्रीमती आरती बर्मन पहले घर में ही थोड़ी-बहुत सिलाई का कार्य करती थीं, जिससे उन्हें प्रतिमाह लगभग 500 से 1000 रुपये तक की आय होती थी। सीमित आमदनी के कारण परिवार का खर्च चलाना कठिन हो रहा था। वे अपने सिलाई कार्य को बढ़ाकर एक बड़ी दुकान खोलना चाहती थीं, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनके पास पर्याप्त पूंजी नहीं थी।

इसी दौरान उन्हें गांव में संचालित स्वसहायता समूह के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने जाना कि समूह से जुड़ी महिलाओं को स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के लिए ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। यह जानकारी उनके जीवन में नया मोड़ लेकर आई और वे रेवा आजीविका स्वसहायता समूह से जुड़ गईं।

समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने सीसीएल ऋण प्राप्त किया और उसी राशि से अपने घर में सिलाई सेंटर की शुरुआत की। उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी और गांव की दूर-दराज की बेरोजगार लड़कियों को सिलाई सिखाने का कार्य शुरू किया। आज कई लड़कियां सिलाई सीखकर स्वयं का रोजगार कर रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं।

धीरे-धीरे आरती बर्मन दीदी का सिलाई व्यवसाय बढ़ता गया। उन्होंने अपने सिलाई सेंटर के लिए 5 सिलाई मशीनें खरीदीं। बढ़ती आमदनी के साथ उन्होंने एक छोटी मनीहारी दुकान भी शुरू की, जहां दैनिक उपयोग की वस्तुएं बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित करने लगीं। आज श्रीमती आरती बर्मन की मासिक आय 12 हजार से 15 हजार रुपये तक पहुंच गई है। बेहतर आमदनी से उन्होंने अपना पक्का मकान भी बनवा लिया है और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाया है।

आरती बर्मन दीदी की सफलता की कहानी यह साबित करती है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन, आर्थिक सहयोग और अवसर मिले तो वे न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि समाज की अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा दे सकती हैं।

Web TV

अगली ख़बर

Leave a comment