कब होगी शराबबंदी? गांव-गांव खुली शराब दुकानों से जवानी की नशों में बह रहा जहर

रिपोर्ट- राकेश शर्मा
सीधी-मध्यप्रदेश में शराबबंदी को लेकर लगातार मांगें एवं सवाल उठ रहे हैं। और सरकार जरा भी सरकती ही नहीं है। गांव-गांव तक शराब की पहुंच ने सामाजिक व्यवस्थाओं और युवाओं के भविष्य पर गंभीर असर डालना शुरू कर दिया है। सीधी जिले सहित प्रदेश के कई ग्रामीण इलाकों में स्कूल, आंगनबाड़ी, पंचायत भवन और अन्य सरकारी संस्थानों के आसपास खुलेआम शराब की बिक्री हो रही है, जिससे स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
ग्रामीणों एवं आम जनता की माने तो जहां बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, वहां आज कई नौजवान नशे की गिरफ्त में आते जा रहे हैं। गांवों में शराब दुकानों और अवैध बिक्री के बढ़ते एवं अपने हाथ पसारते जाल ने अच्छे खासे परिवारों की आर्थिक स्थिति भी कमजोर कर दी है।
महिलाओं और बुजुर्गों द्वारा प्रशासन से लगातार एवं बराबर मांग की जा रही है कि आबकारी नीति की समीक्षा कर गांवों के बीच संचालित शराब दुकानों को बंद किया जाए।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि नशे की लत युवाओं को अपराध, हिंसा और स्वास्थ्य समस्याओं की ओर धकेल रही है। कई स्थानों पर शराब सेवन के कारण घरेलू विवाद और सड़क दुर्घटनाओं के मामले में भी काफी वृद्धि हुई है।
प्रदेश सरकार द्वारा समय-समय पर नशा मुक्ति अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर शराब की आसान उपलब्धता इन अभियानों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर रही है। लोगों की मांग है कि स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और धार्मिक स्थलों के आसपास शराब बिक्री पर सख्त प्रतिबंध लागू किया जाए तथा अवैध शराब कारोबारियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
अब बड़ा एवं ज्वलंत सवाल यही है कि आखिर मध्यप्रदेश में पूर्ण शराबबंदी कब होगी और क्या आने वाली पीढ़ी को नशे के दलदल से बचाने के लिए सरकार कोई ठोस कदम उठाएगी?