माता-पिता व बुजुर्गों के आशीर्वाद से ही जीवन में सुख की गंगा बहती है — स्वामी कृष्णानंद जी महाराज

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सीधी। त्रिदिवसीय सत्संग के दूसरे दिन सद्गुरु स्वामी कृष्णानंद जी महाराज ने सत्संग को संबोधित करते हुए कहा कि माता-पिता एवं बुजुर्गों के आशीर्वाद से ही जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। उन्होंने कहा कि हमारे देश की अवनति का सबसे बड़ा कारण जातिवाद है। जब तक हम जाति-पाति से ऊपर नहीं उठेंगे, तब तक भारत का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है।
स्वामी जी ने कहा कि सद् विप्र समाज का मूल मंत्र है— “जाति-पात से नाता तोड़ो, भाई से भाई का रिश्ता जोड़ो।” उन्होंने बताया कि सभी के प्रति प्रेम और सद्भाव की भावना तभी विकसित होती है, जब व्यक्ति ब्रह्मज्ञानी संत से दीक्षा ग्रहण करता है। गुरु की दीक्षा एवं उपदेश से ही जीवन में परमात्मा के द्वार खुलते हैं।
उन्होंने साधना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु द्वारा प्रदत्त साधना से मन शांत होता है। त्राटक साधना से आंखों, वाणी और चेहरे में तेज आता है। नियमित साधना करने वाला व्यक्ति सांसारिक और आध्यात्मिक—दोनों ही क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करता है। भगवान श्रीराम के जीवन का उदाहरण देते हुए स्वामी जी ने कहा कि उन्होंने भी जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियों का समाधान गुरु स्मरण के माध्यम से किया।
भक्तों के आग्रह पर सद्गुरु स्वामी कृष्णानंद जी महाराज द्वारा प्रातः 8 बजे दीक्षा कार्यक्रम संपन्न कराया गया। इस अवसर पर उन्होंने अमावस्या के दिन हवन-यज्ञ, दान-पुण्य तथा पूर्णिमा के दिन व्रत के महत्व को बताया और इन्हें अपने जीवन में अपनाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम का समापन विशाल भंडारे के साथ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर प्रसाद ग्रहण किया।

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