मेरठ में हुए सोनू कश्यप हत्याकांड पर महोबा में निषाद पार्टी का ज्ञापन, प्रशासन पर पक्षपात का आरोप, एक करोड़ मुआवजे की मांग

LOCATION- MAHOBA-UP
DATE- 17-01-2026
REPORT- Ram Singh
महोबा में निषाद पार्टी ने कलेक्ट्रेट में मेरठ के सोनू कश्यप हत्याकांड मामले को उठाते हुए मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम कार्यालय ने सौंपा गया। ये मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद को मेरठ जाने से रोके जाने पर पार्टी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। निषाद पार्टी ने इस मामले में प्रशासन पर पक्षपात और लीपापोती का आरोप लगाते हुए एक करोड़ रुपये मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग की है।
उत्तर प्रदेश के जनपद मेरठ में हुए मछुआ समाज के युवक सोनू कश्यप की संदिग्ध हत्या के मामले में अब न्याय की को लेकर कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष हरिकृष्ण निषाद की अध्यक्षता में कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट में इस बावत ज्ञापन डीएम कार्यालय में सौंपा है। निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल, यानी निषाद पार्टी, इस मुद्दे पर पूरी तरह से आर-पार के मूड में है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद के निर्देश पर मुख्यमंत्री को सौंपे गए पत्र में मेरठ प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए गए हैं। निषाद पार्टी का आरोप है कि मेरठ के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक इस गंभीर हत्याकांड में शुरू से ही लीपापोती की कोशिश कर रहे हैं। मामला उस वक्त और गंभीर हो गया जब डॉ. संजय निषाद को पीड़ित परिवार से मिलने जाने के दौरान गाजियाबाद की सीमा पर ही रोक दिया गया। पार्टी ने इसे संवैधानिक अधिकारों का हनन बताया है। हैरानी की बात यह है कि जहां सरकार के कैबिनेट मंत्री को रोका गया, वहीं विपक्ष के जनप्रतिनिधियों जैसे मुजफ्फरनगर के सांसद हरेंद्र मलिक और सरधना विधायक अतुल प्रधान को पीड़ित परिवार से मिलने की अनुमति दी गई। निषाद पार्टी के अनुसार, अधिकारियों का यह दोहरा रवैया न केवल पक्षपातपूर्ण है, बल्कि सरकार की छवि को भी धूमिल करने वाला है।
पार्टी ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी मांगों को स्पष्ट कर दिया है। उनकी मांग है कि मेरठ के उन सभी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए जिन्होंने इस मामले में उदासीनता और पक्षपात दिखाया है। इसके साथ ही पीड़ित परिवार के लिए एक करोड़ रुपये का मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, और ग्राम समाज की पट्टे वाली भूमि पीड़ित परिवार के नाम दर्ज करने की मांग रखी गई है। निषाद पार्टी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि पीड़ित परिवार को सुरक्षा मिले और मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो ताकि दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिल सके। अब देखना यह है कि डॉ. संजय निषाद की इस सख्त चिट्ठी और पार्टी के कड़े रुख के बाद शासन और मेरठ प्रशासन का अगला कदम क्या होता है।