नगर में दो बाजार: एक ओर जैविक सेहत, दूसरी ओर पॉलीथिन का जहर

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पांढुरना संवाददाता- निलेश कलस्कर जिला ब्युरोचीफ

पांढुरना। शहर के शुक्रवार बाजार परिसर में वर्तमान में दो अलग-अलग तस्वीरें देखने को मिल रही हैं। जहाँ एक ओर प्रशासन की पहल पर गुरुवार को ‘जैविक हाट’ से सेहत सुधर रही है, वहीं अगले ही दिन लगने वाला ‘शुक्रवार बाजार’ प्रदूषण का केंद्र बन रहा है।

सकारात्मक पहल: गुरुवार का जैविक हाट

प्रत्येक गुरुवार को लगने वाला जैविक बाजार जिले के लिए वरदान साबित हो रहा है। यहाँ किसान बिना किसी रसायन के उगाई गई सब्जियां और अनाज ला रहे हैं। कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्ठ की इस पहल से नागरिक स्वस्थ खान-पान की ओर बढ़ रहे हैं। यह बाजार शुद्धता और प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है।

शुक्रवार बाजार और पॉलीथिन का संकट :

गुरुवार की शुद्धता के ठीक अगले दिन, शुक्रवार को लगने वाले पारंपरिक बाजार में तस्वीर बिल्कुल उलट होती है। यहाँ धड़ल्ले से पॉलीथिन (प्लास्टिक थैलों) का उपयोग किया जा रहा है, जो प्रशासन के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहा है।

बड़ा नुकसान: शुक्रवार बाजार के बाद परिसर में पॉलीथिन का ढेर लग जाता है। यह प्लास्टिक नालियों में फंसकर जलभराव पैदा करता है और मवेशी इन्हें खाकर बीमार पड़ रहे हैं।

प्रशासन से मांग: जागरूक नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को ‘शुक्रवार बाजार’ में पॉलीथिन की बिक्री और उपयोग पर सख्त रुख अपनाना चाहिए। जब तक भारी जुर्माना नहीं लगाया जाएगा, यह ‘प्लास्टिक का जहर’ हमारे पर्यावरण को नष्ट करता रहेगा।

फायदा केवल थैले में: पॉलीथिन भले ही सस्ती लगे, लेकिन भविष्य के स्वास्थ्य के लिए कपड़े का थैला ही सबसे बड़ा फायदा है। प्रशासन को चाहिए कि वह शुक्रवार बाजार को भी गुरुवार की तरह ‘स्वच्छ और हरा-भरा’ बनाए।

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