एंजेल चकमा की हत्या पर पांढुर्णा में उबाल: राष्ट्रपति से लगाई न्याय की गुहार, संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण हेतु सौंपा ज्ञापन

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पांढुरना संवाददाता- निलेश कलस्कर जिला ब्युरोचीफ,

पांढुरना। उत्तराखंड के देहरादून में त्रिपुरा निवासी छात्र एंजेल चकमा की निर्मम हत्या का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस जघन्य हत्याकांड के विरोध में पांढुर्णा जिले के जागरूक युवाओं और ‘संविधान जागरूकता अभियान’ संगठन ने कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है। कल, 1 जनवरी को संगठन के सदस्यों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के माध्यम से भारत गणराज्य की माननीय राष्ट्रपति के नाम एक विस्तृत ज्ञापन प्रेषित किया।

मानवाधिकारों और संविधान पर सीधा प्रहार,

संगठन ने अपने ज्ञापन में इस घटना को केवल एक साधारण अपराध न मानते हुए इसे भारतीय संविधान के मूल सिद्धांतों पर हमला बताया है। प्रतिनिधियों का कहना है कि एंजेल चकमा की हत्या संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का खुला उल्लंघन है। यदि यह अपराध नस्लीय घृणा या क्षेत्रीय पहचान के कारण किया गया है, तो यह देश की ‘विविधता में एकता’ की भावना को कमजोर करता है।

ज्ञापन में उठाई गई प्रमुख मांगें:

संविधान जागरूकता अभियान ने माननीय राष्ट्रपति से इस मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप की अपील करते हुए निम्नलिखित पांच प्रमुख मांगें रखी हैं:

   त्वरित जांच: संबंधित राज्य सरकार को निर्देशित कर मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच समय सीमा के भीतर पूरी कराई जाए।

   कठोर दंड: पकड़े गए दोषियों के विरुद्ध ऐसी कार्रवाई की जाए जो भविष्य के लिए एक मिसाल बने।

   हेट क्राइम की पहचान: यदि हत्या के पीछे नस्लीय कारण हैं, तो इसे ‘घृणा अपराध’ (Hate Crime) की श्रेणी में रखकर विशेष कानूनी प्रावधान लागू किए जाएं।

   मुआवजा एवं सुरक्षा: पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता, कानूनी सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित किया जाए।

   देशव्यापी सुरक्षा तंत्र: देशभर के शिक्षण संस्थानों में पूर्वोत्तर भारत से आने वाले छात्रों की सुरक्षा के लिए एक संवेदनशील मॉनिटरिंग सिस्टम और स्पष्ट दिशानिर्देश विकसित किए जाएं।

न्याय की उम्मीद

ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के सदस्यों ने कहा, “माननीय राष्ट्रपति महोदया संविधान की सर्वोच्च संरक्षक हैं। हमें पूर्ण विश्वास है कि उनके नैतिक हस्तक्षेप से न्याय की प्रक्रिया तेज होगी और समाज में कानून के प्रति विश्वास फिर से सुदृढ़ होगा।” इस दौरान बड़ी संख्या में युवा और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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