सेवा, समर्पण और संघर्ष की प्रतिमूर्ति: किसान ज्ञानेश्वर डोंगरे बदल रहे हैं समाज की तस्वीर

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पांढुरना | संवाददाता- निलेश कलस्कर (जिला ब्युरो चिफ)

 

पांढुरना – ग्राम सिवणी के एक साधारण से खेत में पसीना बहाने वाला किसान आज पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है। हम बात कर रहे हैं ज्ञानेश्वर डोंगरे की, जो पेशे से किसान हैं, लेकिन कर्म से एक सजग समाजसेवक। ‘प्रतिभा निखार फाउंडेशन’ के माध्यम से डोंगरे अपने घर को ही ज्ञान का मंदिर बना चुके हैं, जहाँ वे गरीब बच्चों को नि:शुल्क ट्यूशन, योगा और कराटे का प्रशिक्षण देकर उनका भविष्य संवार रहे हैं।

हनुमान जी के परम भक्त ज्ञानेश्वर की आस्था अटूट है। वे हर साल जामसावली पदयात्रा के दौरान २१ फीट का विशाल ‘श्रीराम पताका’ मंदिर में अर्पित करते हैं। लेकिन उनकी भक्ति सिर्फ मंदिर तक सीमित नहीं है; वे समाज की बुराइयों से लड़ने में भी उतने ही मुखर हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से उन्होंने गाँव की सड़कों, प्रदूषण, अवैध धंधों और नल-जल योजना जैसी बुनियादी समस्याओं को उठाकर प्रशासन की नींद उड़ा दी है।

आर्थिक तंगी और बड़े हौसले

ज्ञानेश्वर डोंगरे के पास विजन की कमी नहीं है, वे गाँव और शहर की तस्वीर बदलना चाहते हैं। लेकिन एक किसान होने के नाते ‘आर्थिक सीमाएं’ उनके बड़े सपनों के आड़े आ रही हैं। बिना किसी सरकारी मदद के वे अकेले दम पर जितना कर रहे हैं, वह हैरतअंगेज है। यदि इस जुझारू व्यक्तित्व को शासन-प्रशासन या किसी बड़े संगठन का सहयोग मिल जाए, तो ग्राम सिवणी प्रगति की नई इबारत लिख सकता है। आज समाज को ऐसे ही निस्वार्थ नायकों की जरूरत है।

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