“हरे नारों की आड़ में सूखा सच”

“माँ के नाम हरियाली, मुनाफ़े के नाम तबाही!”: पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल
पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने सिंगरौली और डिंडोरी के संदर्भ में सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि डिंडोरी में आजीविका मिशन के तहत चलाए गए “एक बगिया माँ के नाम” अभियान की हकीकत ने सरकारी दावों की हवा निकाल दी। बहनों को बांटे गए पौधे हरे भविष्य का पैग़ाम नहीं, बल्कि सूखे झूठ की गवाही निकले। जब 800 से 1000 महिलाओं ने भाजपा के जिला पंचायत अध्यक्ष के साथ सवाल उठाए, तो जवाब सुधार नहीं, दमन बना—दोषियों की जगह सवाल उठाने वालों पर एफआईआर दर्ज कर दी गई।
पटेल ने कहा कि यह रवैया लोकतंत्र नहीं, सत्ता का गुरूर है। जनहित की आवाज़ को कुचलकर नाकामियों पर पर्दा डालने की कोशिश की गई। सरकार की कथनी में संवेदना है, पर करनी में सख़्ती—यही असली तस्वीर है।
इसी बीच सिंगरौली में छह लाख पेड़ काटे जाने के बयान ने सरकार के दोहरे चरित्र पर अंतिम मोहर लगा दी। एक तरफ़ “एक पेड़ माँ के नाम” का भावनात्मक शोर, दूसरी तरफ़ जंगलों को कॉरपोरेट हितों के हवाले करने की तैयारी। यह विकास नहीं, पर्यावरण, जंगल-जमीन और आदिवासी अस्तित्व के साथ खुला विश्वासघात है—जहाँ हरियाली के नारों के पीछे विनाश की कुल्हाड़ी छिपी है।