पांढुरना: कपास जिनिंग मिलों की मनमानी, हक मांगने पर किसान-पत्रकार को दी ‘देख लेने’ की धमकी

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पांढुरना (निलेश कलसकर जिला ब्युरो चिफ)

 

पांढुरना | अन्नदाता की मेहनत पर डाका डालने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ जहां सोने के दाम आसमान छू रहे हैं, वहीं किसानों की उपज कौड़ियों के दाम बिक रही है। ताजा मामला पांढुरना क्षेत्र की एक कपास जिनिंग मिल का है, जहाँ न केवल नियमों की धज्जियाँ उड़ाई गईं, बल्कि हक की बात करने वाले एक किसान, जो पेशे से पत्रकार भी हैं, को मिल मालिक द्वारा सरेआम धमकाया गया।

नियमों को ताक पर रख वसूली जा रही उतराई

नियमानुसार, जब कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) किसानों से कपास की खरीदी करती है, तो गाड़ी खाली करने (उतराई) का पूरा खर्च CCI या संबंधित मिल/एजेंसी को वहन करना होता है। किसान की जिम्मेदारी केवल फसल को केंद्र तक पहुँचाने की होती है। लेकिन पांढुरना की इस मिल में किसानों से अवैध रूप से उतराई के पैसे मांगे जा रहे हैं।

हक मांगा तो मिली धमकी: “बड़ा पत्रकार है तो बाहर निकल”

घटना के अनुसार, जब पीड़ित किसान अपनी फसल लेकर मिल पहुँचा, तो वहां उससे उतराई के पैसों की मांग की गई। किसान ने जब नियमों का हवाला देते हुए पैसे देने से मना किया, तो मिल प्रबंधन विवाद पर उतारू हो गया। आरोप है कि मिल मालिक ने किसान-पत्रकार के साथ अभद्र व्यवहार किया और “ज्यादा बड़ा पत्रकार बनता है, यहाँ से भाग जा, तुझे देख लूँगा” जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर धमकी दी।

प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

क्षेत्र में चर्चा है कि आखिर कब तक किसानों का शोषण होता रहेगा? जो किसान अपनी मेहनत का सही मूल्य पाने के लिए संघर्ष कर रहा है, उसे दबाने और कुचलने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे इस ‘लूट तंत्र’ ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

किसानों ने मांग की है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जाँच हो और संबंधित मिल मालिक पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य किसान के साथ ऐसा दुर्व्यवहार न हो सके।

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