गुरुमगांव के प्राथमिक स्कूल में मिड डे मील में सरकारी डाका

रिपोर्टर सोहन श्याम बजाग डिंडौरी
बच्चों को परोसा जा रहा कीड़ा लगा मोटा चावल, किचन जर्जर — शौचालय अधूरा, फिर भी राशि आहरित
बजाग/डिंडौरी
शासन द्वारा बच्चों को पौष्टिक व स्वच्छ भोजन देने के उद्देश्य से संचालित मध्यान्ह भोजन योजना (Mid-Day Meal) में डिंडौरी जिले के बजाग विकासखंड के ग्राम गुरुमगांव प्राथमिक विद्यालय में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं।
यहाँ बच्चों के हिस्से का पोषक आहार भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है। फाइन क्वालिटी चावल की जगह मोटा, टूटा और कीड़ा लगा चावल बच्चों को परोसा जा रहा है।
चावल में कीड़े, भोजन मीनू का पालन नहीं
विद्यालय परिसर में रखे चावल की जांच में साफ़ तौर पर कीड़े और गंदगी दिखाई दी। शासन द्वारा भेजे गए फाइन चावल के बदले घटिया क्वालिटी का अनाज इस्तेमाल हो रहा है।
स्कूल की दीवार पर मीनू बोर्ड लगा जरूर है — जिसमें सोमवार से शनिवार तक बच्चों के लिए पुलाव, खीर, सब्ज़ी, दाल, लड्डू और सलाद जैसे पौष्टिक व्यंजन लिखे हैं — पर हकीकत में बच्चों को रोज़ सिर्फ सादा चावल और पतली दाल परोसी जा रही है।
ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि “मीनू सिर्फ दिखावे के लिए टांगा गया है, पालन कभी नहीं होता। बच्चों को जो कुछ मिल जाए, वही खा लेना पड़ता है।”
जर्जर किचन — छत का प्लास्टर गिरा छत गिरने की कगार पर।
विद्यालय के रसोईघर (किचन शेड) की हालत बेहद खतरनाक है।
छत का पूरा प्लास्टर उखड़ चुका है, लोहे की सरिए (रॉड्स) खुली हुई हैं और ऊपर से सीलन टपक रही है। बरसात के दिनों में पानी अंदर रिसता है, जिससे भोजन बनाना मुश्किल हो जाता है।
किचन में रखे बर्तन जंग खा चुके हैं और दीवारों पर गंदगी की परतें जमी हैं। साफ-सफाई का नामोनिशान नहीं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह रसोई किसी भी दिन गिर सकती है और बड़ा हादसा हो सकता है।
शौचालय अधूरा, फिर भी बाहर से रंग कर दिखाया पूरा
विद्यालय परिसर में बना शौचालय वर्षों से अधूरा है।
अंदर फर्श नहीं है, न टाइल्स, न पानी की पाइपलाइन।
फिर भी बाहर की दीवारों पर नया रंग-रोगन कर निर्माण पूर्ण दिखा दिया गया और भुगतान निकाल लिया गया।
शौचालय का उपयोग करना बच्चों के लिए असंभव है, इसलिए वे मजबूरी में खुले में शौच जाते हैं — जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।
हैंडवॉश यूनिट टूटी, स्वच्छ पानी की व्यवस्था ठप
बच्चों के लिए बनाई गई हैंडवॉश यूनिट और स्टील टैंक भी टूट-फूट गए हैं।
टोंटियाँ टूटी हैं, पानी का रिसाव लगातार होता रहता है और आसपास गंदगी फैली रहती है।
जिस जगह बच्चों को स्वच्छता सीखनी चाहिए, वहां संक्रमण फैलने का डर बना रहता है।
ग्रामवासियों का आरोप — वर्षों से जारी है खानापूर्ति
ग्रामवासियों ने बताया कि “अधिकारियों की निगरानी सिर्फ कागज़ों तक सीमित है।
जब कभी निरीक्षण की खबर आती है, तो एक-दो दिन सफाई कर ली जाती है, फिर हालात वैसे ही हो जाते हैं।”
ग्रामीणों ने कहा कि यह बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य के साथ मज़ाक है।
प्रशासन की भूमिका संदिग्ध, उच्चस्तरीय जांच की मांग
शिक्षा विभाग और पंचायत अधिकारियों पर भी सवाल उठ रहे हैं कि इतने वर्षों से इन हालातों पर किसी की नज़र क्यों नहीं पड़ी।
ग्रामीणों और अभिभावकों ने जिला कलेक्टर डिंडौरी से मांग की है कि इस विद्यालय में संचालित मध्यान्ह भोजन, निर्माण कार्य और खर्च की गई राशि की उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए।
जिम्मेदार अधिकारियों, ठेकेदारों और सप्लायरों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में बच्चों के साथ इस तरह की लापरवाही न हो।
निष्कर्ष
गुरुमगांव प्राथमिक विद्यालय की स्थिति सरकारी योजनाओं की हकीकत उजागर करती है —
जहाँ बच्चों को पोषण और शिक्षा मिलनी चाहिए, वहाँ भ्रष्टाचार और अनदेखी का बोलबाला है।
अब आवश्यक है कि प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप करे और बच्चों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करे।