पांढुरना कलेक्टर कार्यालय का मुद्दा: जनता vs सरकार

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संवाददाता- निलेश कलसकर, जिला ब्यूरो पांढुरना

 

पांढुरना, 28 अक्टूबर: पांढुरना में कलेक्टर कार्यालय के निर्माण का मुद्दा गरमाया हुआ है। स्थानीय जनता, सामाजिक और राजनीतिक दल वरुड रोड पर प्रस्तावित कार्यालय के निर्माण का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह निर्णय जनता की जरूरतों को नजरअंदाज कर सरकार के फायदे के लिए लिया जा रहा है।

 

इतिहास दोहराएगा?

2018 में कमलनाथ सरकार ने कामठी जलाशय परियोजना को रद्द कर दिया था, जिसका खामियाजा कांग्रेस को सांसद चुनाव में भुगतना पड़ा। जनता ने साफ संदेश दिया था: “जनता जनार्दन है।” अब भाजपा सरकार के सामने वही सवाल है—क्या वे जनता की सुनेंगे या दान की गई जमीन पर कार्यालय बनाएंगे?

 

जनता का दर्द

स्थानीय निवासी कहते हैं, “कलेक्टर कार्यालय पांढुरना में होना चाहिए, वरुड रोड पर नहीं। जिले का विकास पैसे से होता है, सिर्फ अधिकारियों की पोस्टिंग से नहीं।”

 

राजनीतिक मायने

आगामी चुनाव (जनपद, नगर पालिका, विधानसभा, लोकसभा) में जनता फिर अपना फैसला सुनाएगी। सांसद नकुलनाथ को 2019 में पांढुरना-सौसर में हार का सामना करना पड़ा था। क्या इस बार भी भाजपा को जवाब मिलेगा?

 

सरकार के हाथ में फैसला

क्या भाजपा जनता की आवाज सुनेगी या “दलालों” का साथ देगी? जनता तैयार है—वोट का हथियार लेकर।

 

निष्कर्ष: यह लड़ाई जनता बनाम सत्ता की है, जहां एक तरफ विकास की उम्मीदें हैं, तो दूसरी ओर राजनीतिक हित साधने की कोशिश। अगर सरकार ने जनता की अनदेखी की, तो आने वाले चुनाव में इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। फिलहाल, सबकी नजरें भाजपा के फैसले पर टिकी हैं—क्या वे पांढुरना की जनता को प्राथमिकता देंगे, या स्वार्थ की राजनीति हावी होगी? जवाब सिर्फ समय बताएगा, लेकिन एक बात तय है: जनता अब चुप नहीं बैठेगी।

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