जिला अस्पताल भर्ती घोटाला – युवाओं का फूटा गुस्सा : “हमें हमारा पैसा वापस चाहिए”

सीधी जिला अस्पताल में आउटसोर्स भर्ती घोटाला थमने का नाम नहीं ले रहा है। भर्ती प्रक्रिया निरस्त होने से जहां 106 युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया, वहीं नौकरी दिलाने के नाम पर उनसे ली गई 1 से 2 लाख रुपये तक की रिश्वत भी डूब गई।
युवाओं की सीधी मांग
पीड़ित युवाओं का कहना है –
“हमें हमारा पैसा वापस चाहिए, जो मजबूरी में नौकरी के लिए दिया था। न नौकरी मिली, न पैसा लौटा। यह हमारे साथ दोहरा अन्याय है।”
सिविल सर्जन और स्वास्थ्य विभाग पर आरोप,
युवाओं का आरोप है कि पूरी भर्ती प्रक्रिया नियमविरुद्ध थी और इसमें सिविल सर्जन सहित स्वास्थ्य विभाग के कुछ कर्मचारी सीधे तौर पर शामिल थे। बड़ा सवाल यह है कि इतने गंभीर आरोपों और घोटाले के उजागर होने के बावजूद अब तक कलेक्टर की ओर से ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
गड़बड़ी अभी भी जारी,
सूत्रों की मानें तो कुछ लोग अब भी बेरोजगार युवाओं को “हाईकोर्ट से स्टे” दिलाने का लालच देकर उनसे रकम वसूलने की कोशिश कर रहे हैं। इतना ही नहीं, बिना किसी वैध नियुक्ति पत्र और बिना हस्ताक्षर के कई लोग अभी भी अस्पताल में ड्यूटी कर रहे हैं। यह स्थिति न केवल भर्ती प्रक्रिया की सच्चाई उजागर करती है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
मजदूर संघ का बयान,
इस पूरे मामले पर भारतीय मजदूर संघ जिला उपाध्यक्ष, सीधी – विकाश नारायण तिवारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा –
“जिला अस्पताल में ऐसे डॉक्टर भी हैं जो 25-30 वर्षों से एक ही जगह जमे हुए हैं। चाहे सरकार कोई भी आए, उनका सेटिंग हमेशा बना रहता है। सोचने वाली बात है कि लगातार आरोप लगते हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं होती। इसका मतलब साफ है कि ऊपर से संरक्षण मिल रहा है।”
उन्होंने आगे कहा –
“डॉक्टर को भगवान माना जाता है क्योंकि वही मरीज की जान बचाता है। लेकिन अगर वही डॉक्टर भ्रष्टाचार में लिप्त होंगे, तो मरीजों की जिंदगी कैसे बचेगी? ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों और डॉक्टरों पर कठोर कार्रवाई जरूरी है, ताकि अस्पतालों की व्यवस्था सुधरे और भ्रष्टाचारियों में डर पैदा हो।”
मांगें,
भारतीय मजदूर संघ की ओर से प्रशासन से प्रमुख मांगें की गईं –
दोषी डॉक्टरों व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई हो।
बेरोजगार युवाओं से ली गई रिश्वत राशि तत्काल वापस की जाए।
अस्पताल की व्यवस्था को पारदर्शी और सुचारू बनाया जाए।