“कब तक मरीजों की जान जाती रहेगी?” – विकास नारायण तिवारी, भारतीय मजदूर संघ जिला उपाध्यक्ष

सीधी जिला अस्पताल की बदहाल स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में है।
ताज़ा मामले में एक गर्भवती महिला की उपचार के दौरान मौत हो गई, जिससे पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया।
मृतका के परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टर पर लापरवाही और हत्या का आरोप लगाते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
घटना का विवरण
जानकारी के अनुसार, गर्भवती महिला को सीधी जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
परिजनों का कहना है कि समय पर उचित इलाज और जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं।
उनके अनुसार, इलाज में देरी और डॉक्टर की लापरवाही के कारण महिला की जान चली गई।
आक्रोशित परिजनों का प्रदर्शन
घटना के बाद गुस्साए परिजनों ने महिला का शव अस्पताल चौक पर रखकर चक्का जाम कर दिया।
इससे घंटों तक आवागमन बाधित रहा और आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
जाम के दौरान “डॉक्टर को गिरफ्तार करो”, “हत्यारे को सज़ा दो” जैसे नारे गूंजते रहे।
प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी
सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे।
उन्होंने परिजनों से बातचीत की, लेकिन परिजन ठोस आश्वासन मिलने तक आंदोलन खत्म करने को तैयार नहीं हुए।
अंततः जांच और दोषियों पर कार्रवाई का वादा मिलने के बाद चक्का जाम समाप्त हुआ और यातायात बहाल हुआ।
नेताओं की प्रतिक्रिया
भारतीय मजदूर संघ के जिला उपाध्यक्ष विकास नारायण तिवारी ने इस घटना पर गहरी नाराज़गी जताते हुए कहा:
“कब तक मरीजों की जान इस तरह लापरवाही की भेंट चढ़ती रहेगी?
जिला अस्पताल की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है, और प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है।”
उन्होंने मांग की कि दोषी चिकित्सक पर कड़ी कार्रवाई हो और अस्पताल की व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार किया जाए।
बड़ा सवाल – कब सुधरेगी स्थिति?
सीधी जिला अस्पताल में अव्यवस्था, चिकित्सा संसाधनों की कमी और कर्मचारियों की उदासीनता कोई नई बात नहीं है।
पिछले कुछ वर्षों में कई मरीजों की मौत के बाद भी सुधार के ठोस कदम नहीं उठाए गए।
स्थानीय लोग पूछ रहे हैं —
“क्या किसी की जान जाने के बाद ही प्रशासन जागेगा?
आखिर सीधी जिला अस्पताल की हालत कब सुधरेगी?”