रोशन साहू के बचपन में माता पिता के निधन के बाद प्रेरणास्त्रोत बने डाॅ मुन्नालाल देवदास

इस संसार में अनेकों ऐसे बच्चे हैं जो बचपन में ही माँ की ममता और पिता के प्यार को खो चुके हैं। कितना पीड़ादायक होता होगा उन बच्चों का जीवन। जो कल्पना से परे है।
उन्हीं में से एक जीता जागता उदाहरण है गरियाबंद जिले के जेंजरा निवासी रोशन साहू । रोशन साहू का जन्म 15 अप्रैल 1996 को ग्राम जेंजरा में हुआ । उनकी माता का नाम पवन बाई और पिता का नाम महेन्द्र साहू था। महेन्द्र साहू बहुत अच्छे लोककार थे। वे छत्तीसगढी़ नाच पार्टी में डांसर का काम करते थे। रोशन साहू के माता पिता दोनों का निधन सन 2000 में हो गया ।
ऐसी पीड़ादायक परिस्थिति में रोशन साहू को सहारा देने राष्ट्रपति एवं राज्यपाल पुरस्कृत डाॅ मुन्नालाल देवदास सामने आए। उन्होंने शिक्षा के माध्यम से रोशन की जिंदगी में नई रोशनी फैलाकर अपना मानव धर्म निभाए ।
डाॅ देवदास रोशन साहू को प्राथमिक कक्षा से लेकर हायर सेकेंड्री तक स्वयं के खर्चे से पढाए । रोशन साहू शासकीय उच्च्तर माध्यमिक विद्यालय कोपरा से 2012 में 12 वी पास हुए। इसके बाद डाॅ देवदास उन्हें कौशल विकास प्रशिक्षण के लिए हैदराबाद, उत्तराखंड, झारखंड धमतरी और रायपुर जाने में मदद किए ।
प्रशिक्षण के उपरांत संघर्षशील रोशन अब स्वरोजगार के माध्यम से अपने परिवार चलाने के काबिल हुए । उनका मानना है कि हर आदमी को सरकारी नौकरी तो मिल नहीं सकती। इसलिए बेरोजगार रहने के बजाय स्वरोजगार अपनाकर परिवार चलाना ज्यादा लाभदायक है।
वे अपनी जन्मभूमि जेंजरा में अब युवाओं और ग्रामवासियों के साथ मिलकर पौधारोपण एवं अन्य रचनात्मक कार्यों में भी भाग लेते हैं ।
इस संदर्भ में बताना चाहेंगे कि 25 साल के बाद आज प्रथम बार डाॅ देवदास रोशन साहू के घर जेंजरा आए। वे रोशन साहू उनकी पत्नी और बच्चे का वस्त्र और मिठाई आदि देकर सम्मान किए । इस अवसर पर कृषि विस्तार अधिकारी प्रधान सर और गायत्री परिवार से लक्ष्मण यादव उपस्थित थे। रोशन साहू ने भावविभोर होकर कहा कि माता पिता ने मुझे जन्म दिया। लेकिन आपने मुझे पढा़ लिखाकर जिंदगी के हर दर्द को गले लगाकर मुस्कुराना सिखाया। आप मेरे प्रेरणास्त्रोत हो।