इंसाफ की आस में 70 किलोमीटर का सफर नाती ने उठाकर पहुंचाई दादी को कलेक्ट्रेट

"जब व्यवस्था बैठ जाए थककर, तो बूढ़ी आंखें उम्मीद की ओर देखती हैं।”

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दिनांक : 3 जून 2025

सिंगरौली जिले से मानवता और प्रशासन की संवेदनहीनता को झकझोर देने वाली एक मार्मिक घटना सामने आई है। सरई थाना क्षेत्र की एक वृद्ध महिला न्याय की आस में 70 किलोमीटर की दूरी तय कर अपने नाती की गोद में बैठकर जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंची। यह दृश्य न केवल दिल को छू लेने वाला था, बल्कि यह सवाल भी खड़े करता है – क्या इंसाफ पाने के लिए अब बुजुर्गों को गोद में उठाकर दफ्तर-दफ्तर भटकना होगा?

घटना का सार:

वृद्ध महिला का बेटा सर्पदंश का शिकार होकर असमय मृत्यु को प्राप्त हुआ। शासन की ओर से आपदा राहत सहायता राशि मिलनी थी, लेकिन महीनों से तहसील और बैंक की कागजी खानापूर्ति में यह मामला उलझा रहा। कभी तहसील तो कभी बैंक — दोनों ही जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते रहे। वृद्धा असहाय होकर इन दोनों दफ्तरों के चक्कर लगाती रही।

जनसुनवाई बनी अंतिम उम्मीद:

जब सारे रास्ते बंद हो गए तो वृद्ध महिला ने जिला कलेक्टर की जनसुनवाई को अंतिम सहारा समझा। शरीर ने जवाब दे दिया, लेकिन उम्मीद बाकी थी। उसके नाती ने दादी को गोद में उठाकर कलेक्ट्रेट परिसर तक पहुंचाया। यह दृश्य वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम कर गया, लेकिन अफसोस कि प्रशासन की आंखें अभी भी मूंदी हुई हैं।

प्रशासनिक लापरवाही और सवाल:

इस घटना ने एक बार फिर से प्रशासनिक तंत्र की लाचारी और गैर-जवाबदेही को उजागर किया है। यदि स्थानीय अधिकारी समय पर कार्यवाही करते, तो इस महिला को इतना कष्ट न झेलना पड़ता।

क्या जनता को हर बार कलेक्टर के पास ही जाना होगा?

तहसील और बैंक की टालमटोल की नीति पर कौन जिम्मेदार होगा?

क्या जनप्रतिनिधि केवल चुनावी मौसम में ही दिखाई देंगे?

क्या कहता है यह दृश्य:

यह सिर्फ एक महिला की कहानी नहीं है, यह हर उस गरीब, असहाय और जरूरतमंद की कहानी है जो व्यवस्था के जाल में फंसकर न्याय से दूर होता जा रहा है। यदि अब भी प्रशासन ने ऐसे मामलों को गंभीरता से नहीं लिया, तो यह अव्यवस्था कल किसी और के लिए अभिशाप बन सकती है।

अब जरूरत है जवाबदेही की, संवेदना की और समय पर न्याय की। वृद्ध महिला की पीड़ा को केवल ‘मामला विचाराधीन है’ कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्रशासन को अब यह तय करना होगा कि वह जनता के साथ है या सिर्फ फाइलों के ढेर के साथ।

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