बेरोजगारी की मार झेलते पढ़े लिखे नौजवान, अधिकारियों पर प्रशासन मेहरबान

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जागो समाज जागो, युवा साथियों से आग्रह दिल की आवाज बयां करते। निषाद आर पी वर्मन

प्राइड कदम पन्ना मध्य प्रदेश:- हमारा समाज मुख्यतः निषादवंशी समाज कहलाता है किंतु हम लोग अभी भी बहुत-सी जातियो-उपजातियो में बंटे हुए हैं। कोई अपने को केवटवंशी कहता है तो कोई कश्यप-वंशी कोई कहार तो कोई ढीमर मान रहा है और इसी बँटवारे का लाभ हमारे नेता उठा रहे है। हमारे नेता अंग्रेजो से कुछ और सीखे हो या ना सीखे हो किंतु समाजजन के बीच फूट डाल कर उनका शोषण कैसे कर सकते है ये वे बहुत भली प्रकार से जानते है और इसीलिए आजादी के बाद से आज तक हमारा समाज अशिक्षा और अलग-अलग जातियो में बंटा होने के कारण अपना अधिकार नही पा सका है।
रामयण काल महाभारत काल और उसके भी पूर्व वेद शास्त्रो में निषादो का विशेष उल्लेख मिलता है किंतु हमने हमारी पहचान का कोई सदुपयोग नही किया, ना ही वर्तमान में कर पा रहे है। जिस समाज का नाम भगवान राम के साथ जुडा हो या जिस समाज की बेटी की कोख से वेद व्यास और श्रंगी जैसे ऋषि पैदा हुए हों वह समाज जीविका के लिये सरकारो से भीख मांगता फिरे यह बात कुछ गले नही उतरती है, जबकि निषाद वंशी समाज युगों-युगों से एक आत्मनिर्भर समाज रहा है।
जिन्हे भगवान राम का सानिध्य मिला हो वे क्या दीन-हीन हो सकते है. कुछ अम्बेड्करवादि हमारे समाज को नास्तिकता की ओर मोडना चाहते है और इसीलिये हमारी आस्थाओं और विश्वास को डिगाने के लिए वे प्रतिदिन ग्रुप में एक भिन्न धर्म के अनावश्यक वीडियो डाल रहे है किंतु उन्हे यह पता होना चाहिये कि स्वधर्म छोड्कर अन्य धर्म अपनाना बिलकुल भी लाभदायक नही है.
हमारे आदि आदर्श पुरुषो ने तो भगवान से भी, कुछ लेने की बजाय उन्हे देने का ही उपक्रम किया था जैसे केवट ने भगवान श्रीराम से उतराई तक नही ली, वे चाहते तो बोल सकते थे कि लौटने के पश्चत नाव उतराई दे देना किंतु उन्होने कुछ नही मांगा और इसीलिए इतिहास में आज भी केवटजी का नाम सम्मान से लिया जाता है. निषाद राज ने भी श्रीराम को वन के रास्ते दिखलाये उन्हे शृंगवेरपुर में रात्री-विश्राम के समय फलाहार करवाया, भरत को श्रीराम से मिलवाया किंतु अपने लिये कुछ नहीं मांगा।
एक पुरानी कहावत भी है – बिन मांगे मोती मिले, मांगे मिले ना भीख, मांगन से मरना भला, यह सतगुरु की सीख।
मांगने की बजाए यदि हम अपने आप को योग्य बनाएँ तो जो भी हमें चाहिए वह हम हासिल कर सकते है किन्तु यदि योग्यता नहीं है तो जो पास है वह भी हमसे छीन लिया जाएगा। जैसे वर्तमान में हो रहा है कि हमारे तालाबों नदियों पर अन्य धर्म के लोगों का अधिकार होता जा रहा है और हमारे समाज के लोग वहाँ मजदूरी पर कार्य कर रहे है। इसलिए आज सर्वप्रथम हमारे समाज की सबसे बड़ी जरूरत यदि कुछ है तो वह केवल शिक्षा है। दुर्भाग्य से आजादी के बाद वर्षो से हम भिखारियो की तरह सरकारों से आरक्षण की भीख मांग रहे है, किन्तु कभी यह विचार नहीं किया है कि आरक्षण मिलने पर अशिक्षा के अभाव में हमारे समाज के कितने युवाओं को अच्छी सरकारी नौकरी मिल सकेगी, क्या वे आरक्षित वर्ग के लिए आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रतियोगिता का सामना भी ठीक से कर सकेंगे? यदि आरक्षण ही लेना है तो पहले समाज में शिक्षा के प्रति जागृति लाना होगी तभी हम आरक्षण का लाभ उठा सकेंगे।
क्रमशः आगामी किश्त में मैं आपको यह बतलाऊंगा कि हम अपनी जातियों के लिए सरकार से शीघ्र अति शीघ्र आरक्षण कैसे प्राप्त कर सकते है।

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