बेतिया के निजी हॉस्पिटल में जच्चा बच्चा की मौत होना अब आम बात

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क्योंकि निजी हॉस्पिटल मे नर्स और दाई बनी हुई है MBBS डॉक्टर निजी हॉस्पिटल मे प्रसव कराना डॉक्टर के बजाय नर्स और दाई के जीमे हैं प्रसव कराना

बेतिया निजी हॉस्पिटल में प्रसव उपरांत जच्चा-बच्चा की हुई मौत ,मौत के बाद बेतिया में बवाल, डॉक्टर की जगह नर्स और दाई करा रही थी प्रसव, लापरवाही ने ले ली जान

कुमार भास्कर
बेतिया।आए दिन किसी ना किसी दिन निजी हॉस्पिटल में माशुम बच्चो की मौत हो या किसी अन्य बीमारी से पीड़ित अन्य महिला की मौत किसी निजी हॉस्पिटल में होना आम बात हो गई है खबर बेतिया से है जहां प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत हो गई है। बता दें कि बेतिया में मौत के सौदागरों ने एक और महिला की प्रसव के दौरान जान ले ली। घटना के बाद महिला के परिजनों ने घंटों बवाल काटा। सूचना पाकर नगर पुलिस दल बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचकर मामले को शांत कराने में जुट गई और तमाशाबीन बनी रही।

लेकिन मजे की बात ये रही की
इसदौरान करीब 3 घंटे तक
क्लीनिक में मृत महिला का शव पड़ा रहा लेकिन स्वास्थ्य विभाग का कोई भी पदाधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा

मामला नगर के नाजनी चौक स्थित एक क्लीनिक का बताया जा रहा है। मृतका की पहचान नगर थाना क्षेत्र के बसवरिया धुनिया पट्टी निवासी अब्दुल हक की 40 वर्षीय पत्नी सबया खातून के रूप में हुई है। सबया को प्रसव पीड़ा के बाद एक निजी क्लीनिक में प्रसव के लिए भर्ती कराया गया था। जहां पर डॉक्टर के क्लीनिक के गेट के बाहर तो बोर्ड है लेकिन अंदर नर्स और दाई ही काम करती हैं। जिसका नाम शलमा बताया जा रहा है। उसी ने भर्ती कर इलाज करना शुरू किया जिससे जच्चा-बच्चा की मौत हो गई।

मौत के बाद परिजन हंगामा करने लगे जिससे क्लिनिक संचालक,
नर्स और दाई क्लीनिक छोड़कर फरार हो गए। देखते ही देखते क्लीनिक पुलिस छावनी में तब्दील हो गई। काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने आक्रोशित लोगों को शांत कराया। बता दें कि बेतिया जिला में नरकटियागंज, बगहा ,रामनगर, बेतिया नगर निगम में लगभग तीन सौ से अधिक फर्जी क्लीनिक बेधड़क जिला मुख्यालय समेत अन्य जगहों पर कई फर्जी क्लीनिक बेरोक टोक चलाए जा रहे हैं। जिसका कोई सूद लेने वाला नहीं है।

ऐसे में हाल ही में हॉस्पिटल रोड स्थित नमस्वी हड्डी हॉस्पिटल में डॉक्टर दीपक कुमार सिंह के इलाज के दौरान नेपाल की एक मरीज की मौत हुई थी। परिजनों के हंगामा करने पर नगर थाना की पुलिस पहुंची। लेकिन पुलिस के द्वारा मामले को लीपा पोती कर मरीज के परिजन को समझा बुझाकर शांत करा दिया गया। स्वास्थ्य विभाग ने भी कोई कार्रवाई नहीं की। आज भी कई जगह फर्जी क्लिनिक बेतिया समेत विभिन्न स्थानों पर बेखौफ संचालित हैं।क्योंकि सूत्रो से मिली जानकारी अनुसार बताया जा रहा है कि इन सभी फर्जी क्लिनिको से मोटी रकम की उगाही साल में एक दो बार की जाती है इसी कारण यह सब देख स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी आंखें बंद और कान सुन किए बैठे हैं।अब मामला जो भी हो लेकिन जिला प्रशासन और राज्य सरकार के उच्च्यास्तरीय टीम अगर जांच करे तो दूध के दूध का पानी का पता चल ही जाएगा की किस अधिकारी के संरक्षण में इतने बड़े पैमाने पर फर्जी क्लीनिक चलाए जा रहे है आखिर कौन इस बड़े रकम की उगाही की आड़ में चलवा रहा है यह सोचनीय विषय है।

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