मुंबई में लिव इन पार्टनर ने की महिला की हत्या, कटर से किए लाश के टुकड़े

मुंबई में लिव इन पार्टनर ने की महिला की हत्या, कटर से किए लाश के टुकड़े_मुंबई में श्रद्धा वॉल्कर जैसी दहलाने वाली वारदात सामने आई है. यहां एक लिव इन पार्टनर ने महिला की हत्या कर दी. आरोपी ने कटर से लाश के कई टुकड़े किए और उन्हें प्रेशर कुकर में उबाला
लाश के साथ क्रूरता जैसे लाश के किसी हिस्से को खाना, टुकड़े टुकड़े कर देना, उबालना, कुत्तों को खिलाना, फ्रिज में रखना ये सब लक्षण असल में एंटी सोशल पर्सनैलिटी डिसऑर्डर के माने जाते हैं. समाज में अचानक से ऐसी क्रूरता के केस बढ़े हैं. जिस तरह से मीडिया या सोशल मीडिया प्लेटफार्म में इस तरह की खबरें ज्यादा दिख रही हैं, इससे लगता है कि समाज में क्रूरता बढ़ी है.
हर दिन देश-दुनिया में कत्ल की अनगिनत घटनाएं होती हैं. गोली मार देना, चाकू या किसी धारदार हथियार से हत्या जैसे मामलों की खबरों ने तो जैसे लोगों को चौंकाना ही बंद कर दिया है. फिर अचानक आफताब पूनावाला-श्रद्धा वाकर जैसी खबर आती है जिसमें कातिल ने कत्ल के बाद लाश के टुकड़े करके हैवानियत की हदें पार कर दीं. आफताब का मामला अभी सुलझा भी नहीं था कि मुंबई के मीरानगर हत्याकांड ने सबकी नींदें उड़ा दीं.
इस घटना में भी कातिल लिव इन पार्टनर ने सात साल से साथ रह रही प्रेमिका की लाश के टुकड़े टुकड़े किए. उन लाश के टुकड़ों को मिक्सर में पीसा. उन टुकड़ों को उबालकर कुत्तों को भी खिलाया. सामान्य तौर पर कत्ल करने वाले लोगों को क्रिमिनल साइकोलॉजी अलग तरह से व्याख्या करती है. इसमें हालात, परवरिश, शिक्षा, सामाजिक स्थिति, मानसिक हालत सबकुछ जिम्मेदार होते हैं. मगर जब ऐसे मामले सामने आते हैं जिसमें अपने ही परिचित किसी की मौत के बाद लाश के साथ हैवानियत करते हैं, उन्हें साइकोपैथ का दर्जा दिया जाता है.
जानी मानी मनोवैज्ञानिक डॉ विधि एम पिलनिया कहती हैं कि डेड बॉडी के साथ क्रूरता करना मानसिक विक्षिप्तता ही कहा जाएगा. नेक्रोफिनिक टेंडेंसी वाले अपराधी मौत के बाद लाश के साथ सेक्स करना जैसी हरकतें करते हैं. लाश के साथ क्रूरता जैसे लाश के किसी हिस्से को खाना, टुकड़े टुकड़े कर देना, उबालना, कुत्तों को खिलाना, फ्रिज में रखना ये सब लक्षण असल में एंटी सोशल पर्सनैलिटी डिसऑर्डर के माने जाते हैं. समाज में अचानक से ऐसी क्रूरता के केस बढ़े हैं. जिस तरह से मीडिया या सोशल मीडिया प्लेटफार्म में इस तरह की खबरें ज्यादा दिख रही हैं, इससे लगता है कि समाज में क्रूरता बढ़ी है.