हादसा सुरंग वाला, लाशें बिछा गया ट्रक वाला, है कौन जनता का रखवाला

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सीधी से नेशनल ब्यूरो चीफराकेश शर्मा की यह विशेष रिपोर्ट

सीधी ➖ यूं तो जीवन पथ ही हादसों का सफर है, जिस पर चलना भी एक अनिवार्यता है! कुछ लोग होते हैं जो फूंक-फूंक कर कदम रखते और संभलते हैं! और कुछ जानबूझकर काल के गाल में समा जाने को तत्पर रहते हैं! हादसों से हाहाकार, मच चुका है कई बार, पिसती है मासूम पब्लिक हर बार, नहीं जागती फिर भी जनता हो या सरकार! अपनी उपलब्धियां गिनाने के लिए सरकार एवं विभिन्न पार्टियों द्वारा भारी भीड़ राज्य के कोने-कोने से एक जगह जमा कराई जाती है ,लेकिन उस भीड़ की सुरक्षा का तिल भर भी महत्व नहीं दिया जाता ! जनता भी बड़ी मासूम और असहाय सी नजर आती है, जब वह तरह-तरह के वाहनों में जानवरों की तरह स्वयं को झोंकती चली जाती है! जिसका परिणाम कभी-कभी भयावह और रूह को कंपा देने वाला होता है! सीधी जिले के चुरहट के पास टनल हादसा भी चीख चीख कर इस बात की गवाही दे रहा है!

जिन घरों के चिराग इस हादसे में हमेशा के लिए बुझ गए, वहां आजीवन अंधेरे की पैठ क्या सरकार का आंसू पोछने वाला मुआवजा कभी हटा पाएगा? क्या उन घरों में फिर से रोशनी पहुंचा पाएगा? सरकार द्वारा जब डिजिटल जवाने पर फोकस किया जा रहा है तो फिर डिजिटल माध्यम से ही सरकारें लोगों को जिस बात से अवगत कराना चाहती हैं, क्यों नहीं करातीं? भीड़ के रूप में बार-बार शक्ति प्रदर्शन क्यों किया जाता है? ह्रदय को आहत एवं झकझोर देने वाले सवाल क्यों खड़े किए जाते हैं? इन सभी ज्वलंत सवालों का आकलन हम आप पर छोड़ते हैं! अगर वास्तव में कुछ बड़ा हासिल करना चाहते हैं तो आम जनता को अपने दिमाग की बत्ती जलाने की अब विशेष आवश्यकता है !

हादसों के कहर पर सरकार जम्हाई तो लेती है ,दंग दापड़ा भी दिखाती है, जनता को गुमराह करने के लिए आनन-फानन में एक से एक आदेश भी जारी करती हैं, वाहनों की चेकिंग के नाम पर अच्छा खासा राजस्व भी जुटा कर फिर नींद के गहरे आगोश में समा जाती है! यह सब कार्यवाही नाम मात्र की अगर नहीं होती तो जिस ट्रक द्वारा इस हादसे की कहानी गढी़ गई, उस ट्रक के सभी टायर एवं संबंधित क्वालिटी वाले होते और उसमें लाशें बिछा देने का दम कदापि नहीं होता ! ट्रैफिक नियमों की ऐसी की तैसी करने वालों के साथ अगर उसी भाषा में बात की जाती, एंट्री वसूली तक सीमित नहीं रहा जाता तो सदा ही दृश्य कुछ और होता!

 

 

आम जनता हो या फिर सरकार तस्वीरें साफ हैं की नियमों की अनदेखी करने वाले ही तमाम कारण बनते हैं बेवजह कहर बरपाने की, दहशत फैलाने की, धड़कनें बढ़ाने की, हाहाकार मचाने की , अस्पतालों और समशनों में डरावनी तस्वीरें छापने की! जिन लोगों ने ऐसे हालात देखे हैं वह दोबारा फिर से देखना तो नहीं चाहते हैं, पर धीरे-धीरे ही सही आखिरकार होश खो ही देते हैं! जिसका परिणाम होता है भयानक दुर्घटनाओं का भयावह बवंडर!

 

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