विशेष पड़ताल: स्वच्छता के नाम पर गांवों में ‘नरक’ जैसे हालात, क्या यही है पांढुर्णा-सौसर के विकास की तस्वीर?

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पांढुरना संवाददाता- निलेश कलस्कर जिला ब्युरो चिफ

 

पांढुर्णा/सौसर | 4 जनवरी, 2026

लोकहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की अपनी प्रतिबद्धता के साथ आज हम पांढुर्णा और सौसर क्षेत्र की उन ग्राम पंचायतों का कच्चा चिट्ठा खोल रहे हैं, जहाँ स्वच्छता अभियान सिर्फ एक मजाक बनकर रह गया है। धरातल पर जो दृश्य दिखाई दे रहे हैं, वे शासन के दावों और अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़े शौचालय: कागजों में ‘पूर्ण’, जमीन पर ‘शून्य’

यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि हितग्राहियों के लिए स्वीकृत 12,000 रुपये की राशि के शौचालय कई जगहों पर केवल सरकारी फाइलों की शोभा बढ़ा रहे हैं। भ्रष्टाचार का आलम यह है कि बिना निर्माण कार्य के ही राशि का आहरण कर लिया गया। जिन गांवों को ‘ओडीएफ’ (खुले में शौच मुक्त) घोषित किया गया है, वहां की हकीकत देखने के लिए सौसर की पंढरी पंचायत जैसे गांवों की मुख्य सड़कों पर जाना ही काफी है, जहाँ आज भी सुबह-शाम गंदगी का अंबार और सड़ांध विकास की पोल खोलती नजर आती है।

नालियां चोक, रास्तों पर कचरे के पहाड़: बीमारियों को खुला निमंत्रण

गांवों की गलियों की स्थिति बद से बदतर हो चुकी है। नालियां महीनों से साफ नहीं की गई हैं, जिसके कारण सड़ांध मारता कीचड़ सड़कों पर बह रहा है। कूड़ा-कचरा प्रबंधन के नाम पर पंचायतों में आने वाला बजट कहाँ खप रहा है, यह जांच का विषय है। हर चौक-चौराहे पर कचरे के ढेर लगे हैं, जिससे राहगीरों का निकलना दूभर हो गया है। प्रशासन की यह अनदेखी किसी बड़ी महामारी को न्यौता दे रही है।

सामुदायिक शौचालयों की ‘दुर्दशा’: नांदनवाड़ी में सरकारी पैसे की बर्बादी

जनपद पंचायत पांढुर्णा के अंतर्गत ग्राम पंचायत नांदनवाड़ी का सामुदायिक शौचालय प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता स्मारक बन चुका है। लाखों की लागत से बने इस परिसर में न पानी की बूंद है और न ही सफाई की व्यवस्था। देखरेख के अभाव में यह खंडहर में तब्दील हो रहा है। लोकहित में यह सवाल उठाना अनिवार्य है कि क्या जनता के टैक्स का पैसा इसी तरह बर्बादी के लिए बना है?

निष्कर्ष: जवाबदेही तय होना ज़रूरी

यह खबर किसी व्यक्तिगत शिकायत पर आधारित नहीं, बल्कि धरातल पर मौजूद कड़वी सच्चाई है। अधिकारियों को एसी कमरों से बाहर निकलकर इन गांवों की बदहाली देखनी चाहिए। क्या जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी इन पंचायतों के सरपंच और सचिवों पर कार्रवाई करेंगे या भ्रष्टाचार की यह दुर्गंध यूं ही क्षेत्र की हवाओं में घुलती रहेगी?

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