डिंडोरी में पीएम ग्राम सड़क योजना पर खुला खेल! संधारण के नाम पर चल रही लीपापोती—अधिकारियों की मिलीभगत से ठेकेदारों की मौज, ग्रामीण सड़कें बनी दुर्दशा का नमूना

डिंडोरी जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क विकास प्राधिकरण के अंतर्गत किए जा रहे सड़क संधारण कार्यों में भारी अनियमितताएँ उजागर हो रही हैं। जिलेभर में फैले सड़क जाल का हर वर्ष संधारण होता है, लेकिन हकीकत यह है कि काम के नाम पर सिर्फ पुताई, सफेदी और कागजी खानापूर्ति कर सरकारी धन की बंदरबांट की जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार सड़कों पर वास्तविक मरम्मत न के बराबर की जाती है। पुलियों, बोर्डों और किनारों पर थोड़ी-बहुत पुताई कर यह दिखाने की कोशिश की जाती है कि कार्य पूरा हो गया है, जबकि सड़कें उसी जर्जर हालत में पड़ी रहती हैं। साफ-सफाई और जलनिकासी की व्यवस्था का भी सही ध्यान नहीं रखा जाता। इसके बावजूद विभागीय अधिकारी मौके की सच्चाई को अनदेखा कर आंख मूंदकर भुगतान जारी कर देते हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि विभाग किस तरह ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने में लगा है।
जिले से सटे क्षेत्रों में सड़कें खुद गवाही दे रहीं हैं भ्रष्टाचार की
अगर कोई वास्तविक स्थिति जानना चाहता है, तो जिले से लगे मुड़की से टिकरी, पिपरी रोड, नेवसा आदि मार्गों पर जाकर आसानी से देख सकता है कि संधारण कार्य किस स्तर पर हो रहा है। इन सड़कों की दुर्दशा खुद बयान करती है कि विभाग ने किस तरह केवल औपचारिकता निभाकर फाइलें पूरी कर दीं, जबकि जमीन पर हालात ज्यों के त्यों बने हुए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पूरे जिले में संधारण कार्यों में यही स्थिति देखने को मिलती है। प्रश्न यह उठता है कि आखिर इन ठेकेदारों को किसका संरक्षण प्राप्त है, जो वे खुलेआम योजना की धज्जियाँ उड़ाकर भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहे हैं और विभागीय अधिकारी भी मौन समर्थन दे रहे हैं?
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का वास्तविक लाभ तभी मिल पाएगा जब संधारण कार्यों की जांच निष्पक्ष होकर हो और जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर इस लापरवाही को रोका नहीं गया तो यह योजना अपने मूल उद्देश्य—गांवों को बेहतर सड़क सुविधा से जोड़ने—से बहुत दूर रह जाएगी।