आरटीआई में जानकारी न देने पर अधिकारी पर 25,000 रुपये तक के जुर्माने का नोटिस, आयोग ने एक माह में सूचना मुफ्त देने का दिया आदेश

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संवाददाता- निलेश कलसकर जिला ब्युरो चिफ जिला पांढुरना

 

भोपाल। पांढुरना – मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग ने सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) से संबंधित एक महत्वपूर्ण फैसले में तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी (PIO) पर ₹25,000 तक का जुर्माना (शास्ति) लगाने की कार्यवाही शुरू की है। यह मामला छिंदवाड़ा जिले के पांढुर्णा से जुड़ा है।

मामले का विवरण:

अपीलार्थी श्री तेजस सुरजूसे ने दिनांक 12 अक्टूबर 2022 को जिला शिक्षा अधिकारी, छिंदवाड़ा के कार्यालय में एक RTI आवेदन दिया था। इसमें उन्होंने पांढुर्णा के एक शासकीय हाई स्कूल में राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत हुए ₹19.10 लाख के निर्माण कार्य से संबंधित दस्तावेज और फोटो माँगे थे। अपीलार्थी ने निर्माण स्थल का अधिकारियों की उपस्थिति में निरीक्षण करवाने की भी माँग की थी।

आयोग का फैसला और कार्यवाही:

राज्य सूचना आयुक्त ओंकार नाथ ने 31 अक्टूबर 2025 को द्वितीय अपील (A-3061/2023) का निराकरण करते हुए पाया कि आवेदक को निर्धारित समय-सीमा में जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।

तत्काल जानकारी दें: आयोग ने लोक सूचना अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, छिंदवाड़ा को आदेश दिया है कि वे एक महीने के भीतर आवेदक को माँगी गई सभी प्रमाणित दस्तावेजों की प्रतियाँ निःशुल्क उपलब्ध कराएँ।

जुर्माना नोटिस: जानकारी में विलंब करने के कारण, तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी श्री अरविंद कुमार चौरगड़े को RTI अधिनियम की धारा 20(1) के तहत अधिकतम ₹25,000/- की शास्ति अधिरोपित करने हेतु कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया है। उनकी व्यक्तिगत सुनवाई 24 दिसंबर 2025 को नियत की गई है।

RTI कार्यकर्ता का विरोध: ‘आयुक्त ओंकार नाथ निर्माण स्थल जांच के आदेश क्यों नहीं दे रहे?’

आयोग के इस फैसले के एक हिस्से पर अपीलार्थी श्री तेजस सुरजूसे ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

विरोध का आधार: आयोग ने RTI अधिनियम की धारा 2(जे) का हवाला देते हुए निर्माण स्थल का अधिकारियों की उपस्थिति में निरीक्षण करवाने की माँग को यह कहकर खारिज कर दिया कि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।

सुरजूसे का बयान: इस पर श्री सुरजूसे ने कहा है कि “आयोग में आयुक्त महोदय द्वारा सूचना अधिकार की धारा 2(जे) को अनदेखा किया जा रहा है।” उन्होंने सवाल उठाया कि आयुक्त श्री ओंकार नाथ दस्तावेजों के आधार पर ही निर्माण की पुष्टि कैसे करेंगे, जब तक मौका स्थल का निरीक्षण नहीं किया जाता।

पुराने फैसलों का हवाला: अपीलार्थी ने तर्क दिया कि धारा 2(जे) के अंतर्गत संपत्तियों का निरीक्षण में किसी भी कार्य, दस्तावेज और रिकॉर्ड्स का निरीक्षण भी शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह जी द्वारा अपीलार्थियों के पक्ष में ऐसे अधिकांश निर्णय पारित किए जा चुके हैं, और “केवल आयोग में श्री ओंकार नाथ जी ही निर्माण स्थल पर जांच के आदेश में अपनी सहमति नहीं दे रहे जो अपीलार्थी के साथ गलत हो रहा है।”

भ्रष्टाचार बढ़ने की आशंका: सुरजूसे ने चेतावनी दी कि यदि मौका स्थल पर जाँच के आदेश नहीं दिए गए, तो “निर्माण सिर्फ कागजों में होगा।” उन्होंने कहा कि आयुक्त नाथ जी के इस प्रकार के निर्णय से “सिर्फ भ्रष्टाचार को ही बढ़ावा भविष्य में और ज्यादा मिलेगा।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वह आयोग के ऐसे निर्णय से सहमत नहीं हैं।

यह समाचार रिपोर्ट अब आयोग के आदेश और अपीलार्थी के विरोध दोनों को दर्शाती है।

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