ब्लड नहीं, सिस्टम फेल – मरीज की मौत पर उठे प्रशासनिक इंतज़ामों पर सवाल

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सीधी जिला चिकित्सालय में मरीज अजय साकेत की मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत उजागर कर दी। सिविल सर्जन डॉ. एस. बी. खरे ने भले यह स्पष्ट किया कि मरीज को गलत इंजेक्शन नहीं लगाया गया और न ही ऑक्सीजन पाइपलाइन फटी, लेकिन “O Negative” ब्लड न मिल पाना अस्पताल की तैयारी और सिस्टम की कमजोरी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

 

भर्ती के वक्त ही नाजुक थी हालत, खून की कमी और पीलिया से जूझ रहा था मरीज

डॉ. खरे के अनुसार मरीज शराब का आदी था, उसे सीवियर एनीमिया (हीमोग्लोबिन 3.2 ग्राम) और पीलिया (8 mg/dl) था। ड्यूटी डॉक्टर द्वारा तत्काल उपचार शुरू किया गया और खून चढ़ाने की सिफारिश की गई, लेकिन “O Negative” ब्लड ग्रुप न मिलने से स्थिति और बिगड़ गई। प्रशासन द्वारा ब्लड बैंक में दुर्लभ ग्रुप का स्टॉक न होना गंभीर चूक मानी जा रही है।

 

परिजनों ने नहीं माना रेफर, इलाज के दौरान बाथरूम में थमी साँसें

डॉक्टरों ने रीवा रेफर करने की सलाह दी, पर परिजनों ने मना कर दिया। इलाज के बीच परिजन मरीज को बाथरूम ले गए, जहाँ उसकी मौत हो गई। सिविल सर्जन ने कहा कि स्टाफ की ओर से कोई लापरवाही नहीं हुई, लेकिन ब्लड की अनुपलब्धता ने सिस्टम की कमजोरियों को उजागर कर दिया।

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