पढ़ाई नहीं, सफाई” कर रहीं मासूम बच्चियां – आदिवासी अधिकारों की खुली अनदेखी

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डिंडोरी जिले में शिक्षा के अधिकार और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे सरकारी योजनाओ का खुलकर मजाक उड़ाया जा रहा है , ये नारे तब खोखले लगते जब ज़मीनी हकीकत बिल्कुल उलट दिखाई देती है । ताजा मामला डिंडोरी जिले के समनापुर स्थित कन्या आश्रम (अंग्रेजी माध्यम) से सामने आई है जहां की इन तस्वीरों ने पूरे सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर दिया है, यहां पढ़ने की उम्र में मासूम बच्चियों से झाड़ू, पोछा और सफाई करवाई जा रही है।
आश्रम की व्यवस्थाएं पूरी तरह ठेके पर टिकी हैं, जिसका उद्देश्य अच्छी शिक्षा के नाम पर महज खानापूर्ति करना नजर आता है। बताया जा रहा है कि अधीक्षिका धानी मोगरे बीते दस वर्षों से बिना स्थानांतरण के इसी छात्रावास में जमी हुई हैं। उनकी मूल पदस्थापना पिपरिया स्कूल में है, लेकिन प्रभाव और पहुंच के चलते उन्हें कभी हटाया ही नहीं गया विगत दिनों कलेक्टर नेहा मारव्या के निरिक्षण में भी यहां बहुत सी कमियां पाई गई थी लेकिन कार्यवाही नहीं होने से अधिक्षिका के होसलें बूलंद है, अब देखना यह होगा कि ऐसी तस्वीर सामने आने के बाद हास्टल अधिक्षिका पर क्या कार्यवाही होती है या फिर जांच कर अधिकारी सिर्फ खानापूर्ति कर देते हैं ।

डिंडोरी से जिले ब्यूरो मनोज कुमार यादव की रिपोर्ट

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