गुरैया पंचायत में करोड़ों के विकास कार्यों पर सवाल, जनसुनवाई में जांच की मांग

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अमृत सरोवर, चेकडेम, तालाब और मिनी परकुलेशन टैंक समेत कई कार्य जांच के घेरे में; बिल-बाउचर से लेकर भौतिक सत्यापन तक की मांग

 

जिला ब्यूरो मनोज कुमार यादव

 

शहपुरा। ग्राम पंचायत गुरैया में बीते वर्षों में कराए गए विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्यों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। ग्राम गुरैया निवासी सम्हर सिंह मसराम ने 06 अक्टूबर को आयोजित जनसुनवाई में कलेक्टर डिंडौरी के नाम अनुविभागीय अधिकारी राजस्व शहपुरा के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर पंचायत क्षेत्र में कराए गए निर्माण कार्यों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

 

शिकायतकर्ता ने सरपंच, सचिव एवं संबंधित पंचायत कर्मियों पर कथित रूप से गुणवत्ताहीन कार्य कराने, शासकीय राशि के उपयोग में अनियमितता तथा बिल-बाउचर के माध्यम से भुगतान में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। वास्तविक स्थिति प्रशासनिक एवं तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

 

अमृत सरोवर से गेवियन स्ट्रक्चर तक जांच की मांग

 

शिकायत में अमृत सरोवर, गेवियन स्ट्रक्चर, पर्वत पिट और मिनी परकुलेशन टैंक सहित कई निर्माण कार्यों का उल्लेख किया गया है। आवेदन के अनुसार अमृत सरोवर पर करीब 42.15 लाख रुपये, गेवियन स्ट्रक्चर पर करीब 4.80 लाख एवं अतिरिक्त 7.20 लाख रुपये, पर्वत पिट पर करीब 4 लाख तथा मिनी परकुलेशन टैंक पर करीब 12.40 लाख रुपये खर्च किए जाने का उल्लेख है।

 

शिकायतकर्ता का आरोप है कि कुछ स्थानों पर पहले से मौजूद संरचनाओं को नए निर्माण के रूप में दर्शाया गया, जबकि कुछ कार्य ऐसे स्थानों पर कराए गए जहां उनकी उपयोगिता पर सवाल खड़े होते हैं। शिकायतकर्ता ने सभी कार्यों का मौके पर भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है।

 

24.91 लाख के तालाब निर्माण पर भी सवाल

 

गंगा जल संवर्धन योजना के तहत सेमर नाला में करीब 24.91 लाख रुपये की लागत से कराए गए तालाब निर्माण को लेकर भी शिकायत की गई है। शिकायतकर्ता का दावा है कि बांध निर्माण में निर्धारित तकनीकी प्रावधानों का पालन नहीं किया गया तथा बारिश के दौरान पानी के संरक्षण के बजाय वेस्ट वियर के माध्यम से पानी निकल गया। मामले में तकनीकी एवं भौतिक जांच की मांग की गई है।

 

इसके अलावा वर्ष 2016-17 में करीब 14.60 लाख रुपये की लागत से निर्मित तालाब में बांध निर्माण नहीं किए जाने का भी आरोप आवेदन में लगाया गया है।

 

चेकडेम और जल संरचनाओं की उपयोगिता पर उठे प्रश्न

 

छौरहा नाला में वर्ष 2022-23 में करीब 22 लाख रुपये की लागत से बनाए गए चेकडेम को लेकर भी शिकायत की गई है। इसमें गेट नहीं लगाए जाने, निर्धारित खुदाई नहीं होने और पर्याप्त जल संग्रहण नहीं हो पाने का आरोप लगाया गया है।

 

इसी तरह दौरखा नाला के ऊपर करीब 15 लाख रुपये की लागत से बने चेकडेम, उसके समीप करीब 12 लाख रुपये की अन्य संरचना, पीपर टोला में तालाब जीर्णोद्धार, साठिया टोला में चेकडेम एवं नाला विस्तारीकरण सहित स्वागत द्वार और अन्य निर्माण कार्यों को भी जांच के दायरे में लेने की मांग की गई है।

 

एक ही क्षेत्र में बार-बार निर्माण कराने का आरोप

 

शिकायत में वर्ष 2019-20 के मिनी परकुलेशन टैंक और गेवियन स्ट्रक्चर सहित आसपास कराए गए अन्य निर्माण कार्यों का भी उल्लेख है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कुछ स्थानों पर एक ही क्षेत्र में बार-बार निर्माण कर शासकीय राशि खर्च की गई। ऐसे मामलों में मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का सत्यापन कराने की मांग की गई है।

 

वहीं डुकरीगांव मार्ग के समनपुरा क्षेत्र में वर्ष 2024-25 में करीब 12.50 लाख रुपये की लागत से बनाए गए मिनी परकुलेशन टैंक, स्वागत द्वार, सीसी निर्माण सहित अन्य कार्यों की भी जांच की मांग की गई है।

 

स्वागत द्वार और सीसी सड़क निर्माण भी जांच के दायरे में

 

ग्राम पंचायत में सड़क एवं अन्य निर्माण कार्यों को लेकर भी शिकायत की गई है। आवेदन में स्वागत द्वार पर करीब 5 लाख रुपये, सीसी सड़क निर्माण पर करीब 3 लाख रुपये तथा साठिया टोला में सीसी सड़क पर करीब 2 लाख रुपये खर्च किए जाने का उल्लेख है। शिकायतकर्ता ने इन कार्यों की गुणवत्ता, स्वीकृति और भुगतान प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है।

 

बिल-बाउचर, एमबी और मस्टर रोल की जांच की मांग

 

शिकायतकर्ता ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता के साथ-साथ संबंधित कार्यों के बिल-बाउचर, मस्टर रोल, तकनीकी स्वीकृति, एस्टीमेट, एमबी (मेजरमेंट बुक), डीपीआर, उपयोगिता प्रमाण पत्र एवं भुगतान संबंधी अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है।

 

इसके अलावा सप्लायर महिमा ट्रेडर्स से संबंधित बिलों, पंचायत से जुड़े व्यक्तियों के खातों में कथित शासकीय राशि के लेन-देन तथा संबंधित जिम्मेदारों की संपत्ति की भी जांच की मांग आवेदन में की गई है।

 

भौतिक सत्यापन के बाद सामने आएगी वास्तविक स्थिति

 

शिकायतकर्ता ने प्रशासन से ग्राम पंचायत गुरैया में पिछले एवं वर्तमान पंचवर्षीय कार्यकाल में कराए गए सभी निर्माण कार्यों का स्थल निरीक्षण कर भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है। साथ ही यह भी जांचने की मांग की गई है कि निर्माण कार्य स्वीकृत डीपीआर, तकनीकी मापदंड और स्वीकृत लागत के अनुरूप हुए हैं या नहीं।

 

शिकायतकर्ता ने निष्पक्ष जांच नहीं होने की स्थिति में न्यायालय की शरण लेने की बात भी आवेदन में कही है। अब प्रशासन द्वारा इस शिकायत पर क्या कार्रवाई की जाती है और जांच में निर्माण कार्यों को लेकर लगाए गए आरोपों की वास्तविकता क्या सामने आती है, यह देखने वाली बात होगी।

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