सीधी जिले के चुरहट तहसील में पद के दुरुपयोग और कथित वसूली के आरोप, उच्चस्तरीय जांच की मांग(मीडियम साइज शब्दों में ग्रीन कलर में

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तहसीलदार के रीडर पर प्रकरण लंबित रखने और पैसे मांगने का आरोप, शिकायतकर्ता को तहसील कार्यालय से बाहर निकालने तथा एससी-एसटी एक्ट सहित गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कराने का दावा(रेड कलर बड़े साइज शब्द में)

 

प्राइड कदम समाचार सीधी

 

सीधी। जिले की चुरहट तहसील में राजस्व कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। भाजपा विधि प्रकोष्ठ जिला संयोजक सीधी अधिवक्ता अनुज पाण्डेय ने रीवा संभागायुक्त को शिकायत पत्र भेजकर चुरहट तहसीलदार पर पदीय दायित्व के कथित दुरुपयोग, आम लोगों पर दबाव बनाने तथा जायज कार्यों को लंबित रखने के आरोप लगाए हैं। शिकायत में पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है।

 

शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि चुरहट तहसील में पदीय दायित्व का दुरुपयोग करते हुए आम लोगों से विशेष मांग पूरी करने के लिए दबाव बनाया जाता है। मांग पूरी नहीं होने पर उनके जायज कार्यों को भी नाजायज ठहराने अथवा लंबित रखने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि संबंधित अधिकारी के समक्ष अपनी बात रखने पर लोगों को झूठे मुकदमों में फंसाने जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।

 

संतमुनी शर्मा के प्रकरण का उल्लेख

 

शिकायत पत्र में ग्राम नकबेल, तहसील चुरहट निवासी संतमुनी शर्मा के न्यायालयीन प्रकरण का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। पत्र के अनुसार, संतमुनी शर्मा का प्रकरण मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 115 के तहत त्रुटि सुधार के लिए उपखंड अधिकारी चुरहट के न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था।

 

प्रकरण में जांच एवं प्रतिवेदन के लिए इसे तहसीलदार चुरहट को भेजा गया था। शिकायत के अनुसार, मामले में हल्का पटवारी से जांच कराई गई और जांच प्रतिवेदन तैयार किया गया। आरोप है कि प्रतिवेदन तहसील न्यायालय में आने के बाद भी उसे उपखंड अधिकारी के न्यायालय में नहीं भेजा गया।

 

इसके कारण आवेदक को कथित तौर पर बार-बार तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने पड़े। शिकायतकर्ता के अनुसार, वह प्रतिवेदन भेजने के लिए लगातार अनुरोध करता रहा, लेकिन प्रकरण लंबित रखा गया।

 

तहसीलदार के रीडर पर पैसे मांगने का आरोप

 

शिकायत में तहसीलदार के रीडर पर प्रकरण को लंबित रखने और पैसे की मांग करने का आरोप लगाया गया है। पत्र के मुताबिक, इस संबंध में आवेदक ने तहसीलदार से मौखिक रूप से शिकायत करते हुए जांच प्रतिवेदन आगे भेजने का अनुरोध किया।

 

शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस बात से तहसीलदार नाराज हो गईं और उसे कथित रूप से डांटकर तहसील कार्यालय से बाहर निकाल दिया गया।

 

इसके बाद चुरहट थाने में एससी-एसटी एक्ट सहित अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कराए जाने का दावा शिकायत पत्र में किया गया है। शिकायतकर्ता ने इस प्रकरण को भी जांच का विषय बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

 

सीसीटीवी फुटेज और दस्तावेजों की जांच की मांग

 

शिकायतकर्ता ने रीवा संभागायुक्त से मांग की है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच के लिए तहसील कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, संबंधित न्यायालयीन प्रकरण की फाइल, जांच प्रतिवेदन तथा अन्य उपलब्ध दस्तावेजों की जांच कराई जाए।

 

शिकायत में कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति अपने न्यायालयीन प्रकरण के संबंध में अपनी बात रखने या जानकारी लेने जाता है और उसके साथ इस प्रकार की कार्रवाई होती है, तो आम नागरिक अपनी समस्या लेकर कहां जाएगा।

 

पत्र में पूरे मामले को पदीय दायित्व के कथित दुरुपयोग, राजस्व अधिकारियों की कथित निरंकुशता एवं षड्यंत्रपूर्वक कार्रवाई से जोड़ते हुए निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।

 

मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव को भी भेजी प्रतिलिपि

 

शिकायत पत्र में रीवा संभागायुक्त से मामले की गंभीरता से जांच कर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है।

 

पत्र की प्रतिलिपि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री एवं प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन भोपाल को भी भेजे जाने का उल्लेख किया गया है।

 

यह शिकायत 3 सितंबर 2026 को प्रस्तुत की गई है। शिकायतकर्ता ने उपलब्ध साक्ष्यों एवं सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पूरे मामले की वास्तविकता सामने लाने की मांग की है।

 

हालांकि, शिकायत पत्र में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। संबंधित तहसीलदार, रीडर अथवा पुलिस प्रशासन का पक्ष सामने आने पर उसे भी समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित किया जा सकता है।

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