नीति आयोग द्वारा चयनित आकांक्षी विकासखंड बजाग की समीक्षा बैठक सम्पन्न, सीईओ जिला पंचायत ने दिए योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश

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रिपोर्टर-सोहन श्याम

 

डिंडौरी/बजाग – नीति आयोग, भारत सरकार द्वारा चयनित आकांक्षी विकासखंड बजाग की समीक्षा बैठक बुधवार को जनपद पंचायत सभागार बजाग में आयोजित की गई। आकांक्षी विकासखंड कार्यक्रम का उद्देश्य चयनित पिछड़े विकासखंडों में स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, कृषि, जल संसाधन, वित्तीय समावेशन और बुनियादी ढांचे के संकेतकों में तेजी से सुधार लाना है। इसी क्रम में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत डिंडौरी श्री दिव्यांशु चौधरी ने की।

 

बैठक में जिला योजना अधिकारी एवं संयुक्त कलेक्टर सुश्री भारती मेरावी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत बजाग श्री सचिन अग्रवाल, जिला योजना कार्यालय से अभिषेक बंसल, नीति आयोग के आकांक्षी ब्लॉक फेलो डॉ. विकास जैन सहित स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, कृषि, पशुपालन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, आजीविका मिशन सहित सभी विभागों के विकासखंड अधिकारी, पर्यवेक्षक, संकुल प्राचार्य एवं सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी उपस्थित रहे।

 

बैठक में आकांक्षी विकासखंड कार्यक्रम के सभी 38 संकेतकों की बिंदुवार समीक्षा की गई। किन संकेतकों में प्रगति बेहतर है और किनमें सुधार की आवश्यकता है, इस पर विस्तृत चर्चा कर आगामी कार्य योजना तैयार की गई।

 

मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री दिव्यांशु चौधरी ने सख्त लहजे में कहा कि नीति आयोग द्वारा चयनित आकांक्षी विकासखंड बजाग शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता में है, इसलिए किसी भी योजना में लापरवाही या अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी कार्य गुणवत्तापूर्ण और समय-सीमा में पूर्ण होने चाहिए। समीक्षा बैठक में बिना सूचना के अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश भी उन्होंने दिए।

 

उन्होंने स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग को निर्देशित किया कि गर्भवती एवं धात्री महिलाओं से आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से सतत संपर्क बनाए रखा जाए। उनके पोषण आहार की नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा लो बर्थ वेट बेबी की संख्या कम करने के लिए उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान की जाए। टीबी रोगियों का सक्रियता से पता लगाकर उन्हें निक्षय पोषण किट उपलब्ध कराने और नियमित फॉलोअप करने तथा SAM एवं MAM श्रेणी के कुपोषित बच्चों को चिन्हित कर पोषण पुनर्वास केंद्रों में भर्ती कराने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही सभी शासकीय कार्यालयों में विभागवार रोस्टर बनाकर अधिकारियों-कर्मचारियों के स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाने के निर्देश दिए।

 

शिक्षा विभाग की समीक्षा करते हुए बीआरसी एवं संकुल प्राचार्यों को निर्देश दिए कि शिक्षकों की कमी का आंकलन कर प्रस्ताव भेजें, दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए विशेष प्रशिक्षित शिक्षकों की व्यवस्था की जाए। 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणामों में सुधार के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाए। जिन विद्यार्थियों के पिछले वर्ष 60 प्रतिशत से कम अंक आए हैं, उनकी अलग सूची तैयार कर उनके लिए नियमित रेमेडियल क्लास लगाई जाए।

 

अन्य विभागों की समीक्षा में हर घर नल-जल योजना के क्रियान्वयन, बारिश के मौसम में अनाज भंडारण को सुरक्षित रखने और फंगस से बचाने, आजीविका मिशन के तहत अधिक से अधिक महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर लाभान्वित करने, जन्म-मृत्यु पंजीयन का सचिवों द्वारा अपनी आईडी से समय पर अनुमोदन करने, मलेरिया संभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर स्वच्छता उपाय करने तथा एफएमडी वैक्सीनेशन का कार्य पोर्टल पर नहीं होने की स्थिति में ऑफलाइन माध्यम से शत-प्रतिशत पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।

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