पड़रिया खुर्द के आंगनबाड़ी केंद्रों पर अनियमितताओं के आरोप, ग्रामीणों ने उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

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(जिला ब्यूरो मनोज कुमार यादव)

 

 

डिंडोरी/शहपुरा।

जनपद पंचायत शहपुरा अंतर्गत ग्राम पड़रिया खुर्द के आंगनबाड़ी एवं मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) शहपुरा तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी को लिखित शिकायत सौंपकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

 

शिकायत में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि आंगनबाड़ी एवं मिनी आंगनबाड़ी केंद्र लंबे समय से निर्धारित समय के अनुसार संचालित नहीं किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि बच्चों को लगभग 15 से 20 दिनों तक नियमित भोजन उपलब्ध नहीं कराया गया। वहीं, भोजन दिए जाने की स्थिति में भी शासन द्वारा निर्धारित मेन्यू के अनुरूप पोषण आहार नहीं दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि कई दिनों तक बच्चों को केवल सूखे आम के टुकड़े (अंमकड़िया) मिलाकर निम्न गुणवत्ता का भोजन परोसा गया, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।

 

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ महिलाओं से कथित रूप से धोखे से हस्ताक्षर करवाए गए। संबंधित महिलाओं ने लिखित रूप से प्रशासन को बताया है कि उन्हें वास्तविक उद्देश्य बताए बिना बुलाकर हस्ताक्षर कराए गए थे। उनका कहना है कि वे उन हस्ताक्षरों से सहमत नहीं हैं तथा वे ग्रामवासियों की शिकायत का समर्थन करती हैं।

 

ग्रामीणों का कहना है कि मामले को प्रशासन के संज्ञान में लाने के लिए उन्होंने स्थानीय एवं जिला स्तरीय मीडिया के माध्यम से भी अनियमितताओं को उजागर किया था। उनका आरोप है कि समाचार प्रकाशित होने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा की गई जांच निष्पक्ष नहीं रही। शिकायत के अनुसार निरीक्षण के दौरान वास्तविक हितग्राहियों एवं ग्रामीणों के बजाय आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के रिश्तेदारों एवं परिचितों से बयान लेकर हस्ताक्षर कराए गए, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

 

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, बच्चों को शासन के निर्धारित मेन्यू के अनुसार नियमित एवं गुणवत्तापूर्ण पोषण आहार उपलब्ध कराया जाए, वास्तविक हितग्राहियों एवं ग्रामीणों के बयान दर्ज किए जाएं तथा पूर्व में हुई जांच की समीक्षा कर दोषी पाए जाने वाले आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

 

हालांकि, इस मामले में संबंधित विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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